देहरादून के सरकारी स्कूलों में न किताबें मिलीं और न शिक्षक, जनगणना ड्यूटी से पढ़ाई प्रभावित

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देहरादून जिले के सरकारी स्कूलों में नया शिक्षा सत्र शुरू हुए एक महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन छात्र अभी भी अपनी बुनियादी पाठ्यपुस्तकों के लिए तरस रहे हैं। बेसिक से लेकर इंटर कॉलेजों तक के 1,236 विद्यालयों में लगभग 2.98 लाख किताबों की भारी कमी बनी हुई है। विशेष रूप से अंग्रेजी, गणित और विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों की पुस्तकें छात्रों तक नहीं पहुँच पाई हैं।

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विभाग के आंकड़ों के अनुसार, हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर पर स्थिति अधिक गंभीर है, जहाँ करीब 2.45 लाख किताबों की आपूर्ति प्रकाशकों की ओर से लंबित है। किताबों की इस अनुपलब्धता और आगामी ग्रीष्मकालीन अवकाश के बीच छात्रों की पढ़ाई का कीमती समय बर्बाद हो रहा है, जिससे शैक्षणिक सत्र के लक्ष्यों को पूरा करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

शिक्षकों की कमी और एकल शिक्षक के भरोसे स्कूल

किताबों के अभाव के साथ-साथ स्कूलों में शिक्षकों की कमी ने स्थिति को और भी चिंताजनक बना दिया है। जिले के हाईस्कूल और इंटर कॉलेजों में तैनात 1950 शिक्षकों में से लगभग 1050 शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना कार्य में लगा दी गई है। इस प्रशासनिक व्यवस्था के कारण कई स्कूल अब केवल एक ही शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं, जिनके कंधों पर सभी कक्षाओं को संभालने की जिम्मेदारी आ गई है।

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यही हाल बेसिक और जूनियर हाईस्कूलों का भी है, जहाँ शिक्षकों की गैर-मौजूदगी के कारण शिक्षण कार्य पूरी तरह पटरी से उतर गया है। हालांकि शिक्षा विभाग के अधिकारियों का दावा है कि उपलब्ध किताबों का वितरण किया जा रहा है और जल्द ही शेष आपूर्ति भी सुनिश्चित कर ली जाएगी, लेकिन वर्तमान में शिक्षक और संसाधन दोनों की कमी का सीधा असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है।