भारतीय खाद्य निगम (FCI) के गोदामों में अनाज का भंडार तेजी से बढ़ते हुए एक नई ऊंचाई पर पहुंच गया है। आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 तक देश में गेहूं और चावल का कुल भंडार 604.02 लाख टन हो गया है, जो कि निर्धारित बफर मानक (210.40 लाख टन) से लगभग तीन गुना ज्यादा है। स्टॉक की यह स्थिति देश की खाद्य सुरक्षा के लिए बहुत ही सुखद है। इसमें चावल का भंडार 386.10 लाख टन दर्ज किया गया है, जबकि गेहूं का स्टॉक बफर मानक के मुकाबले 217.92 लाख टन तक पहुंच चुका है। फिलहाल रबी फसलों की खरीद प्रक्रिया जारी है और अनाज भंडारण के इन मानकों को तिमाही आधार पर संशोधित किया जाता है।
बाजार में रबी फसलों के दाम एमएसपी से नीचे गिरने की चिंता
अनाज के बम्पर स्टॉक के बीच एक चिंताजनक बात यह सामने आई है कि बाजार में रबी फसलों के थोक दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे बने हुए हैं। मई के पहले सप्ताह के आंकड़ों के मुताबिक, गेहूं का भाव 2,530 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जो कि इसके एमएसपी से 2.13 फीसदी कम है। इसी तरह धान की कीमतों में भी गिरावट देखी गई है और यह एमएसपी से 3.17 फीसदी नीचे गिरकर 2,294 रुपये पर आ गई है। केवल गेहूं और धान ही नहीं, बल्कि मक्का, अरहर, मूंग और सूरजमुखी जैसी फसलों के थोक दाम भी सरकारी समर्थन मूल्य से काफी नीचे कारोबार कर रहे हैं, जिससे किसानों की आय पर प्रभाव पड़ने की संभावना है।
देश में रबी फसल की कटाई और खरीद की वर्तमान स्थिति
देश के कृषि क्षेत्रों में इस समय रबी फसलों की कटाई और सरकारी खरीद का काम जोर-शोर से चल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में बोए गए गेहूं के लगभग 97 फीसदी हिस्से की कटाई पूरी हो चुकी है, जो कुल 334.17 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ था। इसके अलावा, रबी सत्र के धान की कटाई भी करीब 59.32 फीसदी तक पूरी हो गई है, जो मुख्य रूप से तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और त्रिपुरा जैसे राज्यों में केंद्रित है। सरकार की कोशिश है कि खरीद प्रक्रिया के माध्यम से किसानों को उनकी फसलों का उचित लाभ मिल सके और खाद्य भंडार को भविष्य की जरूरतों के लिए सुरक्षित रखा जाए।

