उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी सक्रियता तेज कर दी है और राज्य में जीत की हैट्रिक लगाने के लिए ‘मिशन उत्तराखंड’ पर काम शुरू कर दिया है। इसी रणनीति के तहत दूसरे राज्यों के अनुभवी नेताओं और संगठन पदाधिकारियों का उत्तराखंड पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है, जो यहाँ बूथ मैनेजमेंट और चुनावी समीकरणों को मजबूत करने का काम करेंगे। जिस तरह उत्तराखंड के नेताओं को हाल ही में बंगाल और असम जैसे राज्यों के चुनावों में प्रबंधन के लिए भेजा गया था, ठीक उसी तर्ज पर अब गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों के रणनीतिकार यहाँ आकर पार्टी की स्थिति का आकलन कर रहे हैं।
बूथ मैनेजमेंट और केंद्रीय नेतृत्व की रणनीति
बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने राज्य स्तर पर दो अलग-अलग सर्वे कराने के साथ-साथ विधायकों की परफॉर्मेंस रिपोर्ट कार्ड भी तैयार करना शुरू कर दिया है। पार्टी के सूत्रों का कहना है कि बाहर से आने वाले नेता न केवल चारधाम यात्रा के बहाने प्रदेश का राजनीतिक मिजाज भांप रहे हैं, बल्कि वे संगठन की जमीनी पकड़ को और अधिक मजबूत करने के लिए कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित भी करेंगे। उत्तराखंड में बीजेपी का बूथ मैनेजमेंट मॉडल हमेशा से ही मजबूत माना जाता रहा है, और अब केंद्रीय नेतृत्व इसे और अधिक धार देने के लिए सांसदों, मंत्रियों और विधायकों की एक बड़ी फौज उतारने की तैयारी में है ताकि चुनावी तस्वीर को समय रहते साफ किया जा सके।

