स्वास्थ्य विभाग ने केदारनाथ यात्रा पर 5 साल से कम उम्र के बच्चों को न लाने की दी सलाह

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केदारनाथ धाम की यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी करते हुए 5 साल से कम उम्र के बच्चों को साथ न लाने का आग्रह किया है। समुद्र तल से करीब 11750 फीट की अत्यधिक ऊँचाई पर स्थित होने के कारण यहाँ ऑक्सीजन की कमी और कड़ाके की ठंड बच्चों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। हाल ही में यात्रा के दौरान एक 8 महीने के बच्चे की दुखद मृत्यु और कई बच्चों के अचानक बीमार होने की घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने अभिभावकों से बच्चों की सुरक्षा के प्रति संजीदगी बरतने की अपील की है।

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स्वास्थ्य जोखिम और मौसम की चुनौतियां

केदारनाथ धाम का पैदल मार्ग बेहद कठिन है, जहाँ बारिश और ठंड के कारण बच्चों में हाइपोथर्मिया होने की प्रबल संभावना बनी रहती है। पिछले 12 दिनों के आंकड़ों के अनुसार, करीब 1135 छोटे बच्चे केदारनाथ पहुँचे हैं, जिनमें से कई को मौसम की जटिलताओं के कारण उपचार देना पड़ा है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि महानगरों से आने वाले लोग आस्था के वशीभूत होकर छोटे बच्चों को ले तो आते हैं, लेकिन ऊँचाई वाले क्षेत्रों की विषम परिस्थितियाँ उनके लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं, इसलिए वर्तमान परिस्थितियों में बच्चों को यात्रा पर लाने से परहेज करना ही उचित है।

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महिला और बुजुर्ग यात्रियों के लिए विशेष परिवहन सुविधा

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए परिवहन विभाग रुद्रप्रयाग ने एक सराहनीय पहल करते हुए महिलाओं और बुजुर्गों के लिए 20 विशेष वाहन आरक्षित किए हैं। एआरटीओ धर्मेंद्र सिंह बिष्ट के अनुसार, इन वाहनों के माध्यम से यात्रियों को सोनप्रयाग से गौरीकुंड तक सुगम परिवहन सेवा उपलब्ध कराई जाएगी ताकि उन्हें यात्रा के दौरान कम से कम कठिनाई हो। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और वृद्धों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उनकी यात्रा को अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित बनाना है।

ग्रीन कार्ड अवधि और अन्य यात्रा अपडेट

चारधाम यात्रा के दौरान व्यावसायिक वाहनों के लिए ग्रीन कार्ड की अवधि बढ़ाए जाने को लेकर ट्रेवल्स कारोबारियों में आक्रोश देखा जा रहा है, क्योंकि उनका मानना है कि इससे स्थानीय आय प्रभावित होगी। वहीं दूसरी ओर, बद्रीनाथ धाम में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है, जहाँ अब तक करीब 2 लाख लोग दर्शन कर चुके हैं और बड़ी संख्या में लोग ब्रह्मकपाल तीर्थ में अपने पितरों का तर्पण करने पहुँच रहे हैं। प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है ताकि अलग-अलग धामों में बढ़ती भीड़ और मौसम की चुनौतियों का सही ढंग से प्रबंधन किया जा सके।

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