देहरादून। देहरादून जिले के विकासनगर अंतर्गत भीमावाला में बीते 5 अगस्त को हुई मूसलाधार बारिश ने तीन अनाथ भाइयों की जिंदगी को भंवर में धकेल दिया था। माता-पिता का साया पहले ही उठ चुका था, और अब मूसलाधार बारिश ने 17 वर्षीय साहिल, 10 वर्षीय शोएब और 7 वर्षीय सलमान का सिर छुपाने का सहारा भी छीन लिया। इस आपदा में बेघर हुए मासूमों की पीड़ा जब उत्तराखंड वक्फ बोर्ड तक पहुंची, तो बोर्ड ने बिना समय गंवाए उनकी हरसंभव मदद की जिम्मेदारी उठाई।
शनिवार, 8 अगस्त 2026 को उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स और विकासनगर से भाजपा विधायक मुन्ना सिंह चौहान पीड़ित बच्चों के उजड़े आशियाने पर पहुंचे। दोनों नेताओं ने यतीम बच्चों का हाल जाना और उन्हें बोर्ड की ओर से 51,000 रुपये की आर्थिक सहायता का चेक सौंपा।
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने ऐलान किया कि ‘जहां कम-वहां हम’ के ध्येय वाक्य के तहत बोर्ड तीनों अनाथ बच्चों के रहने-सहने और आगे की पूरी तालीम व पढ़ाई का खर्च उठाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार और स्थानीय विधायक के प्रयासों के साथ-साथ वक्फ बोर्ड भी इन मासूमों के उज्ज्वल भविष्य के लिए हमेशा उनके साथ मजबूती से खड़ा रहेगा, साथ ही उन्होंने स्थानीय समाज और सक्षम लोगों से भी आगे आकर इन बच्चों के भविष्य को संवारने में अपना योगदान देने की अपील की।
विपक्ष पर शादाब शम्स का तीखा हमला
राहत सामग्री और चेक वितरण के दौरान वक्फ बोर्ड अध्यक्ष शादाब शम्स ने विपक्षी दलों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड की संपत्तियों का वास्तविक इस्तेमाल यतीमों, मजलूमों, बेवाओं और बेघर पीड़ितों के कल्याण के लिए होना चाहिए था, लेकिन बीते 75 वर्षों में वक्फ संपत्तियों का केवल दुरुपयोग हुआ और आम मुस्लिम समुदाय को इसका कोई लाभ नहीं मिला।
उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में वक्फ बोर्ड अधिक सक्षम और पारदर्शी बना है। यही कारण है कि अब वक्फ की संपत्तियों का सही इस्तेमाल सीधे तौर पर समाज के अंतिम छोर पर खड़े जरूरतमंदों और अनाथों की मदद के लिए किया जा रहा है।

