टोंस पुल की एप्रोच रोड टूटी तो सरकार का चाबुक चला, हिमालय कंस्ट्रक्शन पर बड़ा एक्शन, सरकार ने लगाई कंपनी पर रोक…

ख़बर शेयर करें

देहरादून। राजधानी देहरादून में टोंस नदी पर बने नवनिर्मित पुल की एप्रोच रोड भारी बारिश और फ्लैश फ्लड के बाद क्षतिग्रस्त होने के मामले में लोक निर्माण विभाग अब सख्त एक्शन मोड में दिखाई दे रहा है। मामले में जहां सरकार ने लापरवाही के लिए तीन अधिकारियों पर निलंबन की कार्रवाई की है, वहीं पुल का निर्माण करने वाली हिमालयन कंस्ट्रक्शन कंपनी पर भी बड़ी कार्रवाई की गई है। प्रमुख अभियंता लोक निर्माण विभाग ने कंपनी का पंजीकरण तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। जारी आदेश के मुताबिक देहरादून-हरबर्टपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के टोंस नदी पर उत्तरांचल यूनिवर्सिटी के समीप क्षतिग्रस्त पुल पुनर्निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य हिमालयन कंस्ट्रक्शन से कराया गया। 28 जुलाई 2026 की सुबह भारी बारिश और फ्लैश फ्लड के कारण अपस्ट्रीम प्रोटेक्शन वॉल के नीचे स्कॉरिंग होने से पुल की एप्रोच रोड क्षतिग्रस्त हो गई। मामला सामने आने के बाद शासन स्तर से इसकी प्रारंभिक जांच कराई गई। जांच में टोंस नदी पर पुल की एप्रोच रोड क्षतिग्रस्त होने का कारण हेवी स्कॉरिंग सामने आया। साथ ही जांच के दौरान यह भी सामने आया कि मौके पर स्कॉर डेप्थ का आकलन नहीं किया जा सका था। इसके बाद जांच अधिकारी ने स्कॉर डेप्थ का वैज्ञानिक तरीके से आकलन कराने के लिए ग्राउंड पेनेट्रेशन रडार (GPR) और इलेक्ट्रिकल रेजिस्टिविटी टेस्ट (ERT) कराने की जरूरत बताई है।इसी जांच के आधार पर लोक निर्माण विभाग ने हिमालयन कंस्ट्रक्शन कंपनी पर शिकंजा कस दिया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि स्कॉर डेप्थ का आकलन होने तक कंपनी का पंजीकरण तत्काल प्रभाव से निलंबित रहेगा। इतना ही नहीं, अग्रिम आदेश तक हिमालयन कंस्ट्रक्शन उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग की किसी भी निविदा प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकेगी। यानी पुल की एप्रोच रोड टूटने के बाद अब कार्रवाई की गाज सीधे उस निर्माण कंपनी पर भी गिरी है, जो विभागीय कार्य से जुड़ी थी। विभाग के इस फैसले से साफ है कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और तकनीकी मानकों को लेकर अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। टोंस पुल प्रकरण ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे। अब विभागीय जांच के बाद कंपनी पर कार्रवाई और अधिकारियों के निलंबन से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि सरकारी निर्माण में खामी सामने आने पर जिम्मेदारी तय होगी और कार्रवाई भी होगी।