देहरादून। उत्तराखंड शिक्षा विभाग में शिक्षकों के अनुरोध के आधार पर होने वाले तबादलों की प्रक्रिया आधी-अधूरी तैयारियों के कारण विवादों में घिर गई है। स्थानांतरण प्रक्रिया को पूरा करने के लिए केवल 55 दिन का समय मिला है, लेकिन विभाग द्वारा तय किए गए कड़े और विरोधाभासी नियमों के कारण राज्यभर के हजारों सरकारी शिक्षक असमंजस में हैं। विशेष रूप से गंभीर रूप से बीमार शिक्षकों के मेडिकल सर्टिफिकेट और आवेदन की अंतिम तिथि को लेकर स्थिति बेहद जटिल हो गई है।
अनुरोध के आधार पर तबादले के लिए आवेदन पत्र ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में जमा करने की अंतिम तिथि 30 जुलाई तय की गई है। हालांकि, विभाग ने नए नियमों के तहत केवल राज्य मेडिकल बोर्ड या एम्स द्वारा 1 जनवरी 2025 के बाद जारी चिकित्सा प्रमाणपत्र को ही मान्य किया है। इससे पहले के सभी प्रमाणपत्रों को पूरी तरह अमान्य कर दिया गया है, जिससे बीमार शिक्षक और उनके आश्रित बेहद परेशान हैं।
सबसे बड़ा प्रशासनिक विरोधाभास यह है कि राज्य मेडिकल बोर्ड से नया प्रमाणपत्र बनवाने के लिए शिक्षकों को सितंबर तक का समय दिया जा रहा है। जब आवेदन की अंतिम तिथि 30 जुलाई है और पूरी तबादला प्रक्रिया ही 27 अगस्त तक संपन्न होनी है, तो सितंबर में मिलने वाले मेडिकल सर्टिफिकेट का कोई औचित्य नहीं रह जाता। इसके बिना बीईओ कार्यालयों में शिक्षकों के आवेदन स्वीकार ही नहीं किए जा रहे हैं।
दूसरी ओर, धारा 27 के तहत मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति ने शासन स्तर पर तबादले मंजूर तो कर दिए हैं, लेकिन इसकी अधिकृत सूची अब तक शिक्षा विभाग को नहीं भेजी गई है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, यह सूची 20 अगस्त को शिक्षा निदेशालय को भेजी जा सकती है, जिसके बाद 15 से 24 अगस्त के बीच स्थानांतरण समिति की बैठकों में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
विभागीय अव्यवस्था पर राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय महामंत्री डॉ. अंकित जोशी ने कहा कि तबादला एक्ट के तहत अधिकारियों की तैनाती का स्पष्ट प्रावधान होने के बावजूद विभाग ने कोई आदेश जारी नहीं किया है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को लेकर संघ का प्रतिनिधिमंडल आज शिक्षा महानिदेशक आकांक्षा कोंडे से मुलाकात कर अपनी मांगें रखेगा।
वहीं, राजकीय शिक्षक संघ के पूर्व प्रांतीय महामंत्री रमेश चंद्र पैन्यूली ने कहा कि पिछले तीन वर्षों से शिक्षकों के अनिवार्य तबादले नहीं हुए हैं। इस साल अनुरोध पर तबादलों की अनुमति तो मिली, लेकिन अव्यावहारिक नियमों के कारण शिक्षकों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है, जिसका शिक्षक संघ पुरजोर विरोध करेगा।

