नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने नैनीताल जिले के ज्योलीकोट और आसपास के गांवों में दूषित पेयजल से फैली बीमारी और दो लोगों की मौत पर कड़ा रुख अपनाया है। मंगलवार को अधिवक्ता रवि बिष्ट की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अधिकारियों को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया। इस सुनवाई का सीधा असर ज्योलीकोट, गांजा, वीरभट्टी, छींणा, बेलुवाखान और सरियाताल क्षेत्र के ग्रामीणों पर पड़ेगा।
कोर्ट ने अधिकारियों की लापरवाही पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि समय रहते सीवर और पेयजल की पाइपलाइनों की मरम्मत कर ली जाती, तो ग्रामीणों को यह त्रासदी न झेलनी पड़ती। सुनवाई के दौरान जल संस्थान के अधिकारियों ने स्वीकार किया कि पुराने कूड़ा खड्ड के पास जल स्रोत में सीवर का पानी मिक्स होने की वजह से यह स्थिति पैदा हुई। इस पर कोर्ट ने कहा कि बीमारी आपकी लापरवाही से फैली है, इसलिए इलाज की पूरी जिम्मेदारी भी आपकी होगी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रश्मि पंत और जल संस्थान व जल निगम के शीर्ष अधिकारी व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश हुए। हाईकोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को महामारी जैसी स्थिति करार देते हुए जिलाधिकारी को राहत कार्यों की स्वयं मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने प्रभावित इलाकों में तत्काल टैंकरों से शुद्ध पेयजल भिजवाने और सीवर लीकेज की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए तुरंत हेल्पलाइन नंबर जारी करने को कहा है। इसके साथ ही कोर्ट ने मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश देते हुए राहत कार्यों की नियमित रिपोर्ट मांगी है।
पेजजल की गुणवत्ता में सुधार के लिए हाईकोर्ट ने पेयजल निगम के सचिव को कुमाऊं क्षेत्र के लिए प्रस्तावित ‘वाटर टेस्टिंग लैब’ को जल्द से जल्द मंजूरी देने के निर्देश दिए। इसके अलावा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नैनीताल व आसपास के 20 से 25 जल स्रोतों से सैंपल लेकर छह दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया है।
अदालत के सख्त रुख को देखते हुए जिलाधिकारी ने मरीजों के निजी लैब में एलाइजा व अन्य जरूरी टेस्ट कराने के लिए तत्काल चार लाख रुपये का बजट जारी कर दिया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जरूरत पड़ने पर इस जांच बजट को और बढ़ाया जाएगा।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दर्जनों मरीजों की लीवर रिपोर्ट पेश कर प्रभावितों के मुफ्त इलाज और मृतकों के परिजनों को मुआवजे की मांग रखी गई। दूषित पानी के कारण एक छात्र और एक महिला की मौत का मुद्दा भी कोर्ट में प्रमुखता से उठा।
सीएमओ डॉ. रश्मि पंत ने अदालत को बताया कि प्रभावित गांवों में आठ डॉक्टरों की टीम, एक एम्बुलेंस और मेडिकल स्टाफ तैनात कर दिया गया है। स्वास्थ्य कर्मी घर-घर जाकर क्लोरीन टैबलेट्स और ओआरएस के पैकेट बांट रहे हैं। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी, जिस दिन डीएम और सीएमओ को दोबारा व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा।

