सल्ट। अल्मोड़ा जिले के सल्ट स्थित मोहन में देश की एकमात्र केंद्रीय आयुर्वेदिक दवा निर्माता कंपनी IMPCL Mohan दिल्ली बैठक में तय होगा आयुर्वेदिक दवा फैक्टरी का भविष्यसे सरकारी नियंत्रण पूरी तरह समाप्त हो गया है। केंद्र सरकार द्वारा विनिवेश प्रक्रिया पूरी कर कमान निजी हाथों में सौंपे जाने के बाद सोमवार को दिल्ली में एक अहम बैठक बुलाई गई है। इस द्विपक्षीय वार्ता में नई मालिक स्काईमैप कंपनी प्रबंधन और श्रमिक ट्रेड यूनियन के प्रतिनिधि आमने-सामने बैठकर फैक्टरी के भावी संचालन और 500 से अधिक कर्मचारियों के भविष्य पर अंतिम फैसला लेंगे।
विनिवेश प्रक्रिया पूरी होते ही संस्था से सरकारी निदेशकों को वापस आयुष मंत्रालय भेज दिया गया है। सरकारी नियंत्रण हटने के बाद अब ट्रांसफर डीड के कानूनी नियमों में पुरानी मालिक कंपनी पर पुराने कर्मचारियों की सेवाएं जारी रखने की कोई बाध्यता शामिल नहीं है। इसी प्रशासनिक अनिश्चितता को दूर करने और लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए दिल्ली की यह वार्ता अत्यंत निर्णायक मानी जा रही है।
दिल्ली में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में कंपनी के नए कॉर्पोरेट सेवा नियमों, नई संचालन नीतियों और वर्तमान स्टाफ के कार्यकाल विस्तार जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा होगी। सालों से न्यूनतम वेतन पर काम कर रहे स्थानीय और अनुभवी श्रमिकों की छंटनी रोकने के लिए ट्रेड यूनियन पूरी मजबूती से अपना पक्ष रखेगी।
उल्लेखनीय है कि निजी हाथों में स्वामित्व जाने के बाद अब दवा फैक्टरी को चालू रखने या बंद करने का अंतिम अधिकार स्काईमैप कंपनी के पास है। यदि प्रबंधन के कड़े रुख या नीतियों के कारण फैक्टरी का उत्पादन ठप होता है, तो इसका असर केवल 500 नियमित और संविदा कर्मियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि क्षेत्र की पूरी अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी।
मोहन स्थित इस आयुर्वेदिक इकाई से जड़ी-बूटी आपूर्ति, परिवहन और पैकेजिंग के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से करीब 10 हजार लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। सल्ट और आसपास के ग्रामीण इलाकों की आर्थिक रीढ़ मानी जाने वाली इस फैक्टरी के भविष्य को लेकर पूरे क्षेत्र की नजरें अब दिल्ली में होने वाले इस फैसले पर टिकी हुई हैं।

