देहरादून। उत्तराखंड में गर्भवती महिलाओं को सामान्य प्रसव के लिए प्रोत्साहित करने और मातृ-शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से सरकार प्रदेश के सभी जिलों में ‘सुप्रा केंद्र’ खोलने जा रही है। आयुष मंत्री मदन कौशिक ने इस महत्वपूर्ण योजना का ऐलान करते हुए बताया कि इन केंद्रों के जरिए गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व सही खान-पान, दिनचर्या और पंचकर्म की विशेष सुविधा मिलेगी। इस योजना के लिए केंद्र सरकार ने 1.30 करोड़ रुपये की वित्तीय मंजूरी दे दी है।
राज्य में मातृ-शिशु मृत्यु दर को कम करने और सिजेरियन प्रसव की निर्भरता घटाने के लिए प्राचीन आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति का विस्तार किया जा रहा है। सरकार की योजना जिला स्तर पर ही गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार, अनुशासित जीवनशैली और विशेषज्ञ मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, प्रसव पूर्व यदि गर्भवती महिलाएं आयुर्वेद आधारित सही खान-पान और पंचकर्म को अपनाएं, तो सिजेरियन की संभावना काफी कम हो जाती है।
प्रदेश में पहली बार सभी 13 जिलों में ये सुप्रा केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। योजना के तहत केंद्र सरकार की ओर से प्रत्येक सुप्रा केंद्र के लिए 10 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। आयुष मंत्री मदन कौशिक ने बताया कि आयुष विंग के साथ-साथ राज्य के आयुर्वेद अस्पतालों का भी उच्चीकरण किया जा रहा है, ताकि महिलाओं को प्रसव पूर्व देखभाल के लिए दूर न भटकना पड़े।
मातृ स्वास्थ्य के साथ-साथ प्रदेश सरकार वेलनेस टूरिज्म को बढ़ावा देने पर भी तेजी से काम कर रही है। इसके तहत मुनिकीरेती, बलवाकोट और कौसानी के लौबांज में अत्याधुनिक वेलनेस केंद्र स्थापित करने के लिए जगह चिन्हित कर ली गई है। 1 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इन केंद्रों में पर्यटकों और मरीजों के लिए प्राइवेट रूम की आधुनिक सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड को देश और दुनिया के लिए योग और आयुष वेलनेस का प्रमुख हब बनाना है। मुनिकीरेती, कौसानी और पिथौरागढ़ जैसे क्षेत्रों में देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं, ऐसे में वेलनेस सुविधाओं का विस्तार होने से राज्य के पर्यटन और स्थानीय रोजगार को सीधी संजीवनी मिलेगी।
इसके अलावा, राज्य के दूरस्थ इलाकों में एलोपैथिक के साथ-साथ पारंपरिक इलाज मुहैया कराने के लिए तीन बड़े फैसले लिए गए हैं। राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालय पौड़ी, बागेश्वर और टिहरी में नए आयुष विंग स्थापित किए जाएंगे। सरकार की ओर से प्रत्येक आयुष विंग के निर्माण के लिए 25 लाख रुपये की बजट राशि मंजूर की गई है, जिससे मरीजों को एक ही छत के नीचे एलोपैथी और आयुर्वेद दोनों का लाभ मिल सकेगा।

