Uttarakhand: UPCL केस हारा, बिजली उपभोक्ताओं पर ₹229 करोड़ का नया भार

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देहरादून। उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड को गामा इंफ्रा कंपनी से जुड़ा कानूनी मामला हारने के बाद 229 करोड़ रुपये का भारी आर्थिक झटका लगा है। देहरादून स्थित विद्युत नियामक आयोग द्वारा बुधवार को सुनाए गए फैसले के बाद इस विशाल राशि की भरपाई राज्य के आम बिजली उपभोक्ताओं से की जाएगी। यूपीसीएल के यह केस हारने से प्रदेश के लगभग 30 लाख बिजली उपभोक्ताओं पर सीधा असर पड़ेगा और हर उपभोक्ता पर औसतन 763 रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।

यह पूरा मामला यूपीसीएल को गैस आधारित बिजली आपूर्ति करने वाली कंपनी गामा इंफ्रा से जुड़ा है। राज्य विद्युत नियामक आयोग ने वर्ष 2017 में गामा इंफ्रा की पहली यूनिट के लिए 388.96 करोड़ रुपये की पूंजीगत लागत स्वीकृत की थी। हालांकि, आयोग ने निर्माण के दौरान लगे ब्याज और प्री-ऑपरेटिव खर्चों को खारिज कर दिया था।

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नियामक आयोग के इस फैसले के खिलाफ गामा इंफ्रा ने केंद्रीय अपीलीय अधिकरण में याचिका दायर की थी। अपटेल ने मामले का संज्ञान लेते हुए नियामक आयोग को निर्देश दिए कि वह रोके गए खर्चों और परियोजना की अतिरिक्त लागत का दोबारा मूल्यांकन करे।

केंद्रीय अधिकरण के आदेश पर विद्युत नियामक आयोग ने मामले की दोबारा सुनवाई की और प्रोजेक्ट खर्च को बढ़ाकर 492.03 करोड़ रुपये तय कर दिया। लागत बढ़ने के कारण यूपीसीएल पर अचानक 229 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ आन पड़ा। इसके खिलाफ यूपीसीएल ने आयोग में पुनर्विचार याचिका दायर की थी।

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विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य प्रभात डिमरी और अनुराग शर्मा की पीठ ने सुनवाई के बाद यूपीसीएल की पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया। आयोग के इस कड़े रुख के बाद यूपीसीएल के पास 229 करोड़ रुपये का भुगतान करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है, जिसे अब उपभोक्ताओं के बिलों से वसूला जाएगा।

उत्तराखंड के बिजली उपभोक्ताओं के लिए यह कोई अकेला झटका नहीं है, बल्कि पिछले कुछ समय में यूपीसीएल की लापरवाही से लगातार आर्थिक बोझ बढ़ा है। इससे पहले ग्रीनको बुद्धिल प्रकरण में भी यूपीसीएल को संबंधित कंपनी को 500 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान करने का आदेश मिल चुका है।

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इसके अलावा हिम ऊर्जा प्रकरण में भी यूपीसीएल पर करीब 250 करोड़ रुपये के भुगतान की देनदारी तय हुई है। वहीं, पावर डेवलपमेंट फंड श्रेणी के तहत यूपीसीएल को यूजेवीएनएल को 556 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अदा करनी है।

अदालत और नियामक आयोग के इन फैसलों के चलते यूपीसीएल पर कुल मिलाकर 1300 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय भार आ चुका है। यूपीसीएल प्रबंधन इन सभी देनदारियों का पैसा किस्तों के रूप में आम उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में जोड़कर वसूल कर रहा है।

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