उत्तराखंड छात्रसंघ चुनाव के नतीजे घोषित: 55 कॉलेजों में ABVP ने मारी बाजी, 24 सीटों पर NSUI ने जमाया कब्जा

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देहरादून। उत्तराखंड के 137 डिग्री कॉलेजों और 4 विश्वविद्यालयों में आयोजित छात्रसंघ चुनाव के नतीजे देर रात घोषित हो गए हैं। चुनाव परिणामों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने अपना दबदबा बनाते हुए 55 महाविद्यालयों में अध्यक्ष पद पर जीत का दावा किया है। वहीं नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया ने 24 सीटों पर जीत का दावा ठोका है, जबकि कई महत्वपूर्ण सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशियों ने बड़ा उलटफेर किया है।

मतदान और मतगणना के दौरान राज्य के सबसे बड़े डीएवी कॉलेज देहरादून में जमकर हंगामा देखने को मिला, जहां पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद स्थिति पर काबू पाया। डीएवी कॉलेज में अध्यक्ष पद पर एबीवीपी के नवदीप राणा और महासचिव पद पर निर्दलीय प्रत्याशी नीलांश विजयी रहे। दूसरी ओर, डीबीएस कॉलेज देहरादून में एनएसयूआई ने पूरे पैनल पर कब्जा जमाया है।

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एबीवीपी के प्रदेश महामंत्री यशवंत पंवार के अनुसार, संगठन ने राज्य भर में 40 अध्यक्ष, 39 उपाध्यक्ष और 39 महासचिव पदों समेत कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर जीत हासिल की है। एबीवीपी ने देहरादून के 5, टिहरी में 5, अल्मोड़ा में 5, हरिद्वार में 4, पौड़ी में 4 और रुद्रप्रयाग में 3 कॉलेजों सहित प्रदेश के अधिकांश परिसरों में जीत दर्ज करने का दावा किया है।

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दूसरी तरफ, एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष विकास नेगी ने 24 महाविद्यालयों में अपना पूरा पैनल जीतने का दावा किया है। एनएसयूआई प्रत्याशी डीबीएस देहरादून, राजकीय महाविद्यालय नरेंद्रनगर, कर्णप्रयाग, जखोली और मुनस्यारी सहित कई कॉलेजों में विजयी रहे हैं। हालांकि, एनएसयूआई ने डीएवी देहरादून, काशीपुर और रामनगर जैसे कॉलेजों में दोबारा मतगणना कराकर एबीवीपी के पक्ष में धांधली करने का गंभीर आरोप भी लगाया है।

छात्रसंघ चुनाव के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विजयी एबीवीपी प्रत्याशियों को बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि “युवाओं ने झूठ की गूंज को बेनकाब कर दिया है और स्पष्ट कर दिया है कि देवभूमि की युवा शक्ति राष्ट्रवादी विचारधारा व छात्रहित के प्रति समर्पित संगठन के साथ मजबूती से खड़ी है।”

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नतीजे घोषित होने के बाद देर रात तक राज्य भर के कॉलेजों के बाहर समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ जश्न मनाया। इन नतीजों ने साफ कर दिया है कि उत्तराखंड के मुख्य छात्र संगठनों के बीच कांटे की टक्कर के बावजूद निर्दलीय उम्मीदवारों की मजबूत मौजूदगी ने कई समीकरणों को बड़े स्तर पर प्रभावित किया है।