उत्तराखंड: पीक सीजन के चलते रोडवेज कर्मियों की छुट्टियों पर लगाई गई रोक, बढ़ाई जाएगी बसों की संख्या

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देहरादून। उत्तराखंड राज्य परिवहन निगम मुख्यालय में हाल ही में संपन्न हुई एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद, वित्तीय दबाव से उबरने और अपनी आय में भारी बढ़ोतरी करने की बड़ी तैयारी शुरू कर दी गई है। महाप्रबंधक संचालन क्रांति सिंह द्वारा जारी किए गए सख्त आधिकारिक आदेश के अनुसार, आगामी 10 अक्टूबर के बाद शुरू होने वाले पीक सीजन, आगामी त्योहारों और शादियों के दौर को ध्यान में रखते हुए सभी मंडलों और डिपो को बस संचालन व्यवस्था को पूरी तरह मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। निगम के इस कड़े प्रशासनिक फैसले का सीधा असर परिवहन विभाग के सभी अधिकारियों, उपाधिकारियों और मैदानी कर्मचारियों पर पड़ा है, जिनकी छुट्टियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।

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परिवहन निगम द्वारा उठाए गए इस कदम का मुख्य और स्पष्ट उद्देश्य त्योहारी तथा शादी-ब्याह के सीजन में यात्रियों की अचानक बढ़ने वाली भारी भीड़ का पूरा लाभ उठाकर निगम के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि करना है। अधिकारियों का ऐसा मानना है कि छुट्टियों पर पूरी तरह रोक लगने से डिपो में कर्मचारियों की शत-प्रतिशत उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी, जिससे रूटों पर अधिक से अधिक बसों का सुचारू संचालन किया जा सकेगा। मुख्यालय की पूर्व अनुमति के बिना अब किसी भी कर्मचारी का अवकाश किसी भी स्थिति में स्वीकृत न करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।

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निगम प्रशासन ने प्रदेशभर के सभी संबंधित डिपो अधिकारियों को यह भी कड़ी हिदायत दी है कि वे अपने निर्धारित तैनाती स्थल पर ही अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें ताकि प्रशासनिक व्यवस्थाओं और बस संचालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही या ढिलाई न बरती जा सके। त्योहारी सीजन के दौरान अक्सर आम यात्रियों को बसों की भारी कमी, लंबी लाइनों और टिकट काउंटर पर भीड़भाड़ जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिन्हें दूर करने के लिए निगम ने यह समय रहते अग्रिम और पुख्ता तैयारी की है।

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सड़क मार्गों पर अधिक बसों के संचालन से न केवल आम यात्रियों को सुगम, सुरक्षित और समय पर यात्रा सुविधा प्राप्त होगी, बल्कि घाटे से जूझ रहे परिवहन निगम की वित्तीय स्थिति को भी एक बड़ा संबल प्राप्त होगा। महाप्रबंधक संचालन द्वारा दिए गए इन निर्देशों के बाद डिपो स्तर पर भी तैयारियां तेज कर दी गई हैं ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और निगम अपने निर्धारित राजस्व लक्ष्यों को आसानी से प्राप्त कर सके।