देहरादून। राजधानी देहरादून की बदहाल सड़कों की सूरत बदलने के लिए लोक निर्माण विभाग का नया प्रयोग शुरुआती दौर में ही दम तोड़ता नजर आ रहा है। परफॉर्मेंस बेस्ड मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट के तहत शहर की 40 प्रमुख सड़कों और 108 किलोमीटर लंबे मार्ग के रखरखाव का जिम्मा छत्तीसगढ़ की एक निजी कंपनी को सौंपा गया है।
सड़कें हैंडओवर होने के बाद से अब तक कंपनी पिछले 10 दिनों में एक भी गड्ढा नहीं भर सकी है। पीडब्ल्यूडी ने बीते अगस्त महीने में ही छत्तीसगढ़ की इस कंपनी के साथ 95 करोड़ रुपये का पांच साल का बड़ा अनुबंध किया था। इसके सुपरविजन और देखरेख की जिम्मेदारी पंजाब की एक अन्य कंपनी को दी गई थी।
कागजों पर यह बड़े दावे किए गए थे कि इस आधुनिक मॉडल के तहत शहर की सड़कें हर मौसम में चकाचक रहेंगी, लेकिन धरातल पर हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। सरकार ने 15 अक्टूबर तक शहर की सभी सड़कों को पूरी तरह गड्ढामुक्त करने का सख्त लक्ष्य तय किया हुआ है। लगातार हुई बारिश के बाद शहर की मुख्य सड़कें बड़े-बड़े और खतरनाक गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। इन गड्ढों के कारण शहर में आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं, जिससे आम जनता और वाहन चालकों की जान पर हर वक्त खतरा मंडरा रहा है।
छत्तीसगढ़ की जिस कंपनी को यह प्रोजेक्ट सौंपा गया है, उसके दायरे में देहरादून-मसूरी मार्ग, राजपुर-कुठालगेट और देहरादून-रायपुर रोड शामिल हैं। इसके अलावा हरिद्वार रोड, सहस्त्रधारा मार्ग, हरबर्टपुर-आसन बैराज और बल्लूपुर-गढ़ी कैंट की महत्वपूर्ण सड़कें भी इसी अनुबंध के अंतर्गत आती हैं।
इस सूची में किशन नगर-एफआरआई, धोरण आईटी पार्क, राजपुर-नांगल-सहस्त्रधारा, लैंसडाउन, न्यू रोड और पटेल मार्ग भी शामिल हैं। साथ ही रेसकोर्स, कचहरी मार्ग, माजरा-धर्मावाला, कांवली-सीताद्वार और शिमला बाईपास-ट्रांसपोर्ट नगर जैसे अत्यधिक व्यस्त मार्ग भी इसी कंपनी के अधीन हैं।
कंपनी के इस लचर और गैर-जिम्मेदाराना रवैये के कारण स्थानीय नागरिकों और यात्रियों में भारी असंतोष सुलग रहा है。 शुरुआती दौर में ही काम में इस तरह की भारी लापरवाही मिलने से शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे है। यदि समय रहते प्रशासन ने इस दिशा में सख्त कदम नहीं उठाए, तो निर्धारित 15 अक्टूबर की समयसीमा तक सड़कों को गड्ढामुक्त करना असंभव साबित होगा। अब देखना यह होगा कि विभाग इस लापरवाह कंपनी पर क्या कार्रवाई करता है।

