उत्तराखंड: 137 करोड़ के ई-चालान न भरने वालों पर बकायेदारों पर कसेगा शिकंजा, सख्त हुआ विभाग

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देहरादून। उत्तराखंड में सड़क पर ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने के बाद भी ई-चालान का भुगतान न करने वाले वाहन चालकों पर अब पुलिस और यातायात निदेशालय का शिकंजा कसने वाला है। यातायात निदेशालय के आंकड़ों के अनुसार, पूरे प्रदेश में जनवरी 2025 से सितंबर 2026 तक के बीच ई-चालान के रूप में करीब 137 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना बकाया चल रहा है, जिससे निपटने के लिए अब नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है। इस सख्त नीति का सीधा असर राज्य के उन तमाम वाहन चालकों पर पड़ेगा जो अब तक चालान भरने से बचते रहे हैं।

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इस समय पूरे उत्तराखंड में करीब 7.22 लाख ई-चालान लंबित पड़े हैं जो भुगतान का इंतजार कर रहे हैं। इस साल के शुरुआती नौ महीनों के दौरान ही जारी किए गए चालानों में से 3.87 लाख का भुगतान नहीं हुआ है, जिन पर 66.63 करोड़ रुपये का जुर्माना बकाया है। इसके अलावा, वर्ष 2025 के दौरान काटे गए 3.35 लाख ई-चालान की राशि भी चालकों ने अभी तक जमा नहीं कराई है।

बकाया वसूली के रास्ते में कानूनी पेच और वाहनों के पंजीकरण में गलत मोबाइल नंबर दर्ज होने जैसी दिक्कतें बड़ी बाधा बनी हुई हैं। मौजूदा कानूनी अड़चनों के कारण पुलिस सीधे तौर पर बकायेदारों के वाहन सीज नहीं कर पा रही है और गलत नंबर होने के कारण चालकों से संपर्क भी नहीं हो पा रहा है। इन सभी कमियों को दूर करने के लिए यातायात नियमों में बदलाव किए जा रहे हैं, ताकि बकायेदारों से जुर्माने की वसूली सुगम हो सके।

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यातायात निदेशक केके वीके के अनुसार, ई-चालान का भुगतान न होना केवल उत्तराखंड की नहीं बल्कि पूरे देश की समस्या है, जहां कुल मिलाकर करीब 4500 करोड़ रुपये के चालान लंबित हैं। उन्होंने वाहन चालकों से समय पर बकाया राशि चुकाने की अपील की है और चेतावनी दी है कि बकाया नहीं चुकाने वालों पर भविष्य में सख्ती और बढ़ाई जाएगी।

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इस नई व्यवस्था के लागू होने से वाहन चालकों की मुश्किलें काफी हद तक बढ़ने वाली हैं। जिन चालकों के चालान लंबे समय से लंबित हैं, उन्हें अपने वाहन का बीमा कराने और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र बनवाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, सड़क पर गाड़ी चलाते समय चेकिंग के दौरान भी ऐसे चालकों के लिए कानूनी परेशानियां खड़ी हो सकती हैं।