उत्तराखंड ने हिमाचल को पछाड़ा: आर्थिक विकास में बना नं-1 पहाड़ी राज्य

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कभी पर्वतीय राज्यों के लिए विकास का मॉडल माने जाने वाले हिमाचल प्रदेश को उत्तराखंड ने अब आर्थिक मोर्चों पर पीछे छोड़ दिया है। पिछले चार वर्षों में दोनों राज्यों की वित्तीय स्थिति में बड़ा अंतर देखने को मिला है। जहाँ हिमाचल प्रदेश गंभीर आर्थिक तंगी के कारण अपने उच्चाधिकारियों के वेतन में 20 से 30% की कटौती करने को मजबूर है, वहीं उत्तराखंड में लगभग 30 हजार युवाओं को सरकारी नौकरियां मिली हैं। उत्तराखंड की प्रति व्यक्ति आय में भी भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो 2021-22 के मुकाबले अब 2,74,000 रुपये तक पहुँच गई है। यह आंकड़े राज्य की मजबूत होती अर्थव्यवस्था और सुधरते जीवन स्तर को दर्शाते हैं।

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आर्थिक और सामाजिक सूचकांकों में ऐतिहासिक सुधार

अपर सचिव-सीएम बंशीधर तिवारी के अनुसार, उत्तराखंड के मल्टी डायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स (बहुआयामी गरीबी सूचकांक) में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। राज्य में गरीबी का स्तर 9.7% से घटकर 6.92% रह गया है। इसके साथ ही ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स भी 0.718 से बढ़कर 0.722 हो गया है, जो राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार का प्रमाण है।

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उद्योग और स्टार्टअप्स के क्षेत्र में रिकॉर्ड वृद्धि

उत्तराखंड में औद्योगिक गतिविधियों ने भी रफ्तार पकड़ी है। राज्य में एमएसएमई की इकाइयां 59,798 से बढ़कर अब 79,394 हो गई हैं। इसके अलावा, बड़ी इंडस्ट्रीज की संख्या 128 और स्टार्टअप्स की संख्या 1,750 तक पहुँच चुकी है। राज्य की GSDP भी वित्त वर्ष 2024-25 में 3,81,889 करोड़ रुपये रही है, जो पिछले वर्षों की तुलना में करीब डेढ़ गुना अधिक है।

हिमाचल और उत्तराखंड की वित्तीय स्थिति में अंतर

जहाँ उत्तराखंड के सरकारी कर्मचारियों को समय पर वेतन वृद्धि और प्रमोशन जैसे लाभ मिल रहे हैं, वहीं पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश में स्थिति इसके विपरीत है। हिमाचल सरकार ने 18 अप्रैल को अधिसूचना जारी कर वेतन कटौती का निर्णय लिया है, जो 1 मई से लागू होगा। आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड ने अपनी नीतियों के दम पर आर्थिकी और रोजगार के मामले में हिमाचल के साथ ‘जमीन-आसमान’ का अंतर पैदा कर दिया है।