देहरादून। उत्तराखंड के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में फैल रही क्षेत्रीय बीमारियों के कारणों का पता लगाने के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग ने व्यापक शोध की तैयारी शुरू कर दी है। विभाग के निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना के अनुसार, प्रदेश में बीमारियों के स्थायी निवारण के लिए एक विशेष एथिकल समिति का गठन किया गया है। यह पूरा अनुसंधान भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद और उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के संयुक्त सहयोग से संचालित किया जाएगा।
इस योजना के तहत प्रदेश के सभी राजकीय मेडिकल कॉलेजों में समर्पित ‘रिसर्च सेल’ का गठन जल्द पूरा किया जाएगा। शुरुआती चरण में गठित एथिकल कमेटी में मेडिकल कॉलेजों के वरिष्ठ संकाय सदस्यों और छात्र प्रतिनिधियों को शामिल किया जा रहा है। यह समिति शोध के दौरान नैतिक मानकों, पारदर्शिता और डेटा की सटीकता पर पैनी नजर रखेगी।
पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बढ़ते कैंसर, दूषित पानी से होने वाले संक्रमण, पशुओं से फैलने वाले रोगों और नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज के मामलों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। अब तक डॉक्टर क्लिनिकल स्तर पर इन बीमारियों के कारणों का केवल अनुमान लगाते थे। समर्पित शोध न होने के कारण इनकी रोकथाम के लिए उठाए गए कदम पूरी तरह कारगर साबित नहीं हो पा रहे थे। मैदानी जिलों में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही बनी हुई है।
इससे पहले डॉक्टरों द्वारा पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों से तैयार की गई ग्राउंड रिपोर्ट में एक स्थायी शोध प्रणाली की आवश्यकता जताई गई थी। इसी मांग को देखते हुए विभाग ने बीमारियों के मूल कारणों की गहराई तक जाने और उनके खात्मे के लिए यह संगठित ढांचा तैयार किया है।
बीमारियों की तेज और सटीक पहचान के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल को भी अपनी जांच प्रक्रिया में शामिल करने जा रहा है। हालांकि, इस एआई स्क्रीनिंग में डॉक्टरों और विशेषज्ञों का मानवीय दखल पूरी तरह बना रहेगा। एआई मॉडल के सही इस्तेमाल के लिए मेडिकल कॉलेजों के फैकल्टी सदस्यों का चयन कर उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इसके साथ ही डॉक्टरों की कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों में बने स्किल सेंटरों को और अधिक हाईटेक किया जाएगा। वर्तमान में इन सेंटरों में डॉक्टरों को चारधाम यात्रा, महाकुंभ और कांवड़ मेला जैसी ड्यूटी के लिए ट्रेंड किया जाता है। अब इन्हीं स्किल सेंटरों में शोध में शामिल डॉक्टरों को आधुनिक तकनीक और नए शोध उपकरणों का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

