देहरादून। सीयूईटी और समर्थ पोर्टल के माध्यम से उच्च शिक्षा में प्रवेश की व्यवस्था को लेकर निजी कॉलेज एसोसिएशन ने मोर्चा खोल दिया है। एसोसिएशन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर समर्थ पोर्टल की प्रवेश व्यवस्था को तत्काल समाप्त करने की मांग की है। आरोप है कि इस जटिल प्रक्रिया के कारण उच्च शिक्षा का चालू शैक्षणिक सत्र पूरी तरह से अनियंत्रित और पिछड़ चुका है।
सीयूईटी प्रवेश परीक्षा का परिणाम जुलाई में घोषित होने के बाद अगस्त में प्रवेश प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन सितंबर का आधा महीना बीत जाने के बाद भी दाखिले पूरे नहीं हो सके हैं। प्रवेश प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी से छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जिससे कॉलेजों और छात्रों दोनों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
समर्थ पोर्टल की जटिलता के कारण नाममात्र की फीस वाले अशासकीय कॉलेजों में भी 50 प्रतिशत तक सीटें खाली पड़ी हैं। स्थिति को देखते हुए अब मजबूरी में नॉन-सीयूईटी छात्रों के लिए मेरिट के आधार पर प्रवेश की विज्ञप्ति जारी की गई है, जिसके तहत आवेदन की अंतिम तिथि 15 सितंबर तय की गई है।
डीएवी कॉलेज एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सुनील अग्रवाल ने चौंकाने वाले आंकड़े साझा करते हुए बताया कि जिस डीएवी कॉलेज में पहले दाखिले के लिए 30 हजार से अधिक आवेदन आते थे, वहां अब 12,400 सीटें भरना भी चुनौती बन गया है। उन्होंने कहा कि जब कम फीस वाले सरकारी अनुदान प्राप्त कॉलेजों का यह हाल है, तो निजी कॉलेजों की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
निजी कॉलेज एसोसिएशन ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सीयूईटी और समर्थ पोर्टल की व्यवस्था कुछ चुनिंदा एजेंसियों को वित्तीय लाभ पहुंचाने के मकसद से लागू की गई है। उनका कहना है कि इस व्यवस्था ने दाखिला प्रक्रिया को सुगम बनाने के बजाय विद्यार्थियों के लिए अत्यधिक मुश्किल और तनावपूर्ण बना दिया है।
एसोसिएशन ने शासन और केंद्र सरकार से मांग की है कि समर्थ पोर्टल के माध्यम से प्रवेश की अनिवार्यता को तुरंत प्रभाव से समाप्त किया जाए। उन्होंने मांग की है कि कॉलेजों को पूर्व की भांति अपने स्तर पर पारदर्शी तरीके से मेरिट के आधार पर सीधी प्रवेश प्रक्रिया संचालित करने की छूट दी जानी चाहिए।
नॉन-सीयूईटी छात्रों के लिए 15 सितंबर तक मेरिट से प्रवेश का अवसर मिलने से कुछ राहत जरूर मिलेगी, लेकिन एसोसिएशन का साफ मानना है कि जब तक समर्थ पोर्टल की इस व्यवस्था को समाप्त या सरल नहीं किया जाता, तब तक उच्च शिक्षा का सत्र सामान्य नहीं हो पाएगा।

