देहरादून। उत्तराखंड में अल्पसंख्यक बच्चों को आधुनिक शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की सरकारी मुहिम को शुरुआती दौर में बड़ा झटका लगा है। 1 जुलाई को मदरसा बोर्ड समाप्त कर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन के एक महीने बाद भी राज्य के 452 मदरसों में से केवल 7को ही मान्यता मिल सकी है। इस सुस्त रवैये पर प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने साफ कर दिया है कि 30 सितंबर की समयसीमा खत्म होते ही बिना मान्यता वाले मदरसों के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को सिफारिश भेजी जाएगी।
राज्य सरकार का मकसद मदरसों में पढ़ रहे बच्चों को धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ गणित, विज्ञान और आधुनिक विषयों से जोड़ना है। सरकार चाहती है कि मुस्लिम, सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई और पारसी समुदाय के सभी शैक्षणिक संस्थान एक समान पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था के तहत आएं। हालांकि, पुराने मदरसा बोर्ड से मान्यता प्राप्त 41 मदरसों में से भी अधिकतर नए कड़े मानकों पर खरे नहीं उतर पाए हैं।
देहरादून के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी द्वारा प्राधिकरण को सौंपी गई जांच रिपोर्ट ने स्थिति और गंभीर कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार, कई मदरसा संचालकों ने नए नियमों के तहत मान्यता लेने से साफ इनकार कर दिया है। वहीं, कुछ स्थानों पर जांच करने पहुंची प्रशासनिक टीमों को सूचना देने तक से मना कर दिया गया, जबकि कुछ अन्य संचालक कागजी कार्रवाई पूरी करने की बात कह रहे हैं।
जिलों की स्थिति देखें तो उधमसिंह नगर में मान्यता के लिए आए सभी 11 मदरसों के आवेदन मानक पूरे न होने के कारण खारिज कर दिए गए। हरिद्वार जिले में आवेदन करने वाले 18 में से मात्र 7 मदरसों को ही हरी झंडी मिल सकी है। इसके विपरीत, देहरादून और नैनीताल जैसे बड़े जिलों में अब तक मान्यता प्रक्रिया को लेकर समीक्षा बैठक तक आयोजित नहीं हो पाई है।
अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि 30 सितंबर को 3 महीने का तय समय पूरा हो रहा है। इसके बाद गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों के पास केवल दो विकल्प रहेंगे या तो वे निर्धारित मानकों को पूरा कर तुरंत मान्यता लें, अन्यथा उनमें पढ़ रहे बच्चों को सामान्य सरकारी या मान्यता प्राप्त स्कूलों में शिफ्ट कर दिया जाएगा ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।
बिशन सिंह बोरा की इस विशेष रिपोर्ट के मुताबिक, 30 सितंबर की डेडलाइन करीब आते ही अल्पसंख्यक कल्याण और शिक्षा विभाग ने सख्त प्रशासनिक कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है।

