उत्तराखंड सूचना आयोग का बड़ा फैसला, RTI से नहीं मिलेगी थाने की CCTV फुटेज

ख़बर शेयर करें

देहरादून। उत्तराखंड सूचना आयोग ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि सूचना के अधिकार के तहत पुलिस कोतवाली की सीसीटीवी फुटेज नहीं दी जा सकती। राज्य सूचना आयुक्त कुशलानंद कोठियाल ने देहरादून की विकासनगर कोतवाली से जुड़े एक मामले में सुनवाई करते हुए पुलिस विभाग के रुख को सही माना और याचिकाकर्ता की मांग को खारिज कर दिया।

यह पूरा मामला देहरादून के राजीव नयन नौटियाल नाम के व्यक्ति से जुड़ा है, जिन्होंने आरटीआई के तहत विकासनगर कोतवाली की एक विशेष समय अवधि की CCTV रिकॉर्डिंग मांगी थी। इस आवेदन पर पुलिस विभाग ने सुरक्षा और गोपनीयता का हवाला देते हुए जानकारी देने से साफ मना कर दिया था।

यह भी पढ़ें -  Dehradun Raid: ताज, JDW मैरियट और हयात के किचन में पहुंची फूड सेफ्टी टीम, मचा हड़कंप

मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस विभाग ने आयोग के सामने आरटीआई कानून की धारा 8 का हवाला दिया। विभाग का कहना था कि इस धारा के तहत पुलिस को विशेष छूट प्राप्त है और सुरक्षा कारणों से थाने के भीतर की वीडियो रिकॉर्डिंग सार्वजनिक नहीं की जा सकती।

पुलिस ने आयोग को बताया कि कोतवाली परिसर में शस्त्रागार होता है और केस से जुड़े गोपनीय मुखबिरों का लगातार आना-जाना रहता है। अगर सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक की जाती है, तो मुखबिरों की सुरक्षा और पहचान को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

यह भी पढ़ें -  Uttarakhand: 1 माह में मात्र 1% मदरसों को मान्यता, 30 सितंबर के बाद कार्रवाई तय

इसके अलावा पुलिस विभाग ने थाने में आने वाली पीड़ित महिलाओं, बच्चों और अन्य आरोपियों की निजता का तर्क भी रखा। विभाग का कहना था कि रिकॉर्डिंग सार्वजनिक होने से नागरिकों के प्राइवेसी के अधिकार का उल्लंघन होगा।

राज्य सूचना आयुक्त कुशलानंद कोठियाल ने पुलिस विभाग के इन सभी तर्कों को न्यायसंगत और कानूनी रूप से सही माना। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कोतवाली परिसर की गोपनीयता और सुरक्षा बनाए रखना बेहद जरूरी है, इसलिए याचिकाकर्ता को सीसीटीवी रिकॉर्डिंग नहीं दी जा सकती।

यह भी पढ़ें -  Uttarakhand Weather Alert: 12 जिलों में अगले 24 घंटे भारी; फ्लैश फ्लड का अलर्ट, प्रशासन मुस्तैद

हालांकि, आयोग ने पुलिस विभाग को एक सख्त निर्देश भी जारी किया। आयोग ने आदेश दिया कि मांगी गई अवधि की सीसीटीवी फुटेज को पुलिस अपने पास सुरक्षित रखेगी, ताकि भविष्य में अगर अदालत किसी मामले की सुनवाई के दौरान साक्ष्य मांगती है, तो इसे पेश किया जा सके।

सूचना आयोग के इस फैसले ने साफ कर दिया है कि आरटीआई के जरिए कोई भी व्यक्ति पुलिस थाने की फुटेज हासिल नहीं कर सकता। हालांकि, न्यायिक जांच और अदालती प्रक्रिया के लिए यह रिकॉर्डिंग एक महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में सुरक्षित रखी जाएगी।

ADVERTISEMENTS Ad Ad Ad