देहरादून। उत्तराखंड के बहुचर्चित ITI भवन निर्माण से जुड़े 130 करोड़ रुपये के घोटाले में आईजी गढ़वाल रेंज कार्यालय की SIT ने बड़ी कानूनी कार्रवाई की है। एसआईटी ने नेहरू कॉलोनी थाने में दर्ज मुकदमों की जांच पूरी करते हुए यूपी राजकीय निर्माण निगम के तीन सेवानिवृत्त अधिकारियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। आईजी गढ़वाल रेंज राजीव स्वरूप ने पांच मुकदमों में जांच पूरी होने और चार्जशीट भेजे जाने की आधिकारिक पुष्टि की है।
एसआईटी जांच में गबन और वित्तीय अनियमितता के दोषी पाए गए तीनों पूर्व अधिकारी अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। यूपी निर्माण निगम की आंतरिक जांच के आधार पर तत्कालीन परियोजना प्रबंधक शिव आसरे शर्मा, तत्कालीन परियोजना प्रबंधक प्रदीप कुमार शर्मा और सेवानिवृत्त सहायक लेखाधिकारी स्तर-2 वीरेंद्र कुमार रवि को सरकारी धनराशि को नुकसान पहुंचाने और गबन का मुख्य जिम्मेदार ठहराया गया है।
पूरा मामला वर्ष 2018 से पहले का है, जब उत्तराखंड में 15 आईटीआई भवनों के निर्माण के लिए 1517.50 लाख रुपये का बजट जारी किया गया था। यूपी निर्माण निगम के अपर परियोजना प्रबंधक सुनील मलिक ने नेहरू कॉलोनी थाने में एक साथ कुल छह मुकदमे दर्ज कराए थे, जिसमें आरोप लगाया गया था कि आवंटित राशि का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया है।
एसआईटी की विस्तृत जांच में खुलासा हुआ कि कुल 15 में से 9 आईटीआई भवनों का निर्माण तो करा लिया गया था, लेकिन 6 स्थानों पर जमीन ही उपलब्ध नहीं हो सकी थी। इनमें बसुकेदार, चिरबिटिया, बडावे, थल, गंगोलीहाट और कठपुडियाछीना शामिल हैं, जहां भूमि न मिलने के कारण निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हो सका।
गंभीर आरोप है कि इन छह स्थानों के लिए जारी की गई सरकारी धनराशि को नियमों को ताक पर रखकर IUT के जरिए दूसरे विभागों के कामों में खर्च कर दिया गया। जब यूपी निर्माण निगम ने इस पूरी रकम का हिसाब-किताब मांगा और राशि जमा कराने के निर्देश दिए, तो इन अफसरों ने न तो बजट का कोई हिसाब दिया और ना ही राशि जमा कराई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी ने आरोपी तीनों पूर्व अधिकारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं 409 और 120बी के तहत कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस कार्रवाई से भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी जांच को बड़ी सफलता मिली है।
आईजी गढ़वाल रेंज राजीव स्वरूप ने बताया कि 130 करोड़ रुपये के इस घपले से संबंधित पांच मामलों में जांच पूरी कर चार्जशीट कोर्ट भेज दी गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रकरण से जुड़े छठे मुकदमे में भी जांच अंतिम चरण में है और जल्द ही उसमें भी विधिक कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी।
सरकारी बजट के दुरुपयोग और छह आईटीआई भवनों के बजट के गायब होने की पुष्टि के बाद हुई इस सख्त कानूनी कार्रवाई से प्रशासनिक और विभागीय गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है। रिटायरमेंट के बाद भी अफसरों पर कसी गई इस नकेल से साफ संदेश गया है कि सरकारी धन के गबन के मामलों में बख्शा नहीं जाएगा।

