“बदरीनाथ धाम में सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर रोक नहीं”, सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर बैन को लेकर महाराज ने तोड़ी चुप्पी

ख़बर शेयर करें

देहरादून। उत्तराखंड के धर्मस्व एवं पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने बदरीनाथ धाम में सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर पाबंदी की खबरों को खारिज करते हुए अपनी खामोशी तोड़ी है। उन्होंने कहा कि कुछ असामाजिक तत्व यह झूठी अफवाह फैला रहे हैं कि श्री बदरीनाथ धाम में संगीत, नृत्य या सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रतिबंधित हैं, जो कि पूरी तरह गलत और आधारहीन है।

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के अनुसार, बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के पावन अवसर पर स्वयं सेना का बैंड धार्मिक धुनों और मंगल संगीत की प्रस्तुति देता आ रहा है। उन्होंने कहा कि धाम में हमेशा से संगीत के माध्यम से ही ईश्वर की स्तुति की जाती रही है और पूर्व में भी यहां कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं।

यह भी पढ़ें -  उत्तराखंड: केदारनाथ-बदरीनाथ में उमड़ा आस्था का जनसैलाब, अब तक पहुंचे 53.23 लाख यात्री

मंदिर के भीतर शंख बजाने को लेकर उठ रहे सवालों पर महाराज ने कहा कि बदरीनाथ मंदिर के अंदर शंख बजाना वर्जित है, क्योंकि शंख अस्थि से बना होता है। हालांकि, उन्होंने यह साफ किया कि मंदिर परिसर के बाहर शंख बजाने पर किसी भी तरह का कोई प्रतिबंध नहीं है।

यह भी पढ़ें -  उत्तराखंड चारधाम यात्रा का टूटा रिकॉर्ड: 53 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

शंख को हड्डी से बना बताने वाले सतपाल महाराज के बयान पर चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने तीखा एतराज जताया है। महापंचायत के महासचिव बृजेश सती ने कहा कि सनातन परंपरा में धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान शंख बजाने की प्राचीन परंपरा रही है। उन्होंने कैबिनेट मंत्री को सनातन परंपरा का सम्मान करने और शास्त्र तथा पुराण पढ़ने की सलाह दी।

यह भी पढ़ें -  दून अस्पताल में बदहाली: इमरजेंसी से OPD भेजे जाने पर महिला मरीज बेहोश, 9 घंटे टला अल्ट्रासा

बदरीनाथ धाम में परंपराओं और शंख बजाने के नियमों को लेकर उपजे इस विवाद के बाद तीर्थ पुरोहितों और श्रद्धालुओं के बीच चर्चाएं तेज हो गई हैं। वहीं धर्मस्व विभाग का कहना है कि धाम की समस्त व्यवस्थाएं सनातन मान्यताओं और तय परंपराओं के अनुसार ही संचालित की जाएंगी।