नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हरिद्वार स्थित जिला न्यायालय, जिलाधिकारी कार्यालय, तहसील, एसएसपी कार्यालय और सार्वजनिक शौचालयों की दयनीय स्थिति पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार, डीएम हरिद्वार और हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से दो सप्ताह में जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त को होगी।
यह याचिका ‘नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट हरिद्वार’ के कृष्ण कांत की ओर से दाखिल की गई है। याचिका में बताया गया कि निरीक्षण के दौरान कोर्ट परिसर, डीएम, एसएसपी और तहसील कार्यालयों के शौचालयों की स्थिति बेहद चिंताजनक पाई गई। जो शौचालय ठीक हालत में थे, उनमें ताला लगा हुआ था, जिससे वहां आने वाले आम नागरिकों और कर्मचारियों को भारी परेशानी हो रही है।
खंडपीठ ने डीएम हरिद्वार से पूछा है कि जनवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘राजीव कलिता बनाम केंद्र सरकार‘ मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को सरकारी स्थलों पर चालू फ्लश, बिजली, पानी और सफाई से युक्त सुलभ शौचालय बनाने के स्पष्ट निर्देश दिए थे, जिनकी लगातार अनदेखी की जा रही थी।
इसी सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य में प्लास्टिक कचरे का सही निस्तारण न होने पर भी नाराजगी जताई। कोर्ट ने पंचायतीराज और शहरी विकास विभाग के निदेशकों से पूछा कि पूर्व में दिए गए आदेशों के तहत सिंगल यूज प्लास्टिक और प्लास्टिक मैनेजमेंट पर क्या ठोस कदम उठाए गए हैं?
खंडपीठ ने प्रदेश के मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट और कूड़ा निस्तारण को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए। कोर्ट ने कहा कि इस अभियान में स्कूली बच्चों, आम नागरिकों और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े लोगों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद होगी।
एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में नैनीताल हाईकोर्ट ने चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग में ‘नर्सिंग अधिकारी’ भर्ती को लेकर दायर याचिका को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ताओं ने 17 नवंबर 2025 और 3 जून 2026 को जारी भर्ती विज्ञापनों को चुनौती देते हुए वर्ष 2020 और 2022 की तर्ज पर वर्षवार चयन की मांग की थी।
न्यायाधीश पंकज पुरोहित की पीठ ने फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि अभ्यर्थियों को वर्षवार चयन का कोई वैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है। चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड ने अदालत को बताया कि नियमावली के अनुसार भर्ती लिखित परीक्षा से ही होती है। वर्ष 2020 और 2022 में कोविड-19 स्वास्थ्य आपातकाल की विशेष परिस्थितियों के चलते ही अपवाद के रूप में वर्षवार चयन किया गया था।

