देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को खटीमा और मसूरी गोलीकांड के अमर शहीदों को नमन करते हुए राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के लिए पेंशन में बड़े इजाफे की घोषणा की है। राजधानी देहरादून में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में सीएम धामी ने कहा कि 1 सितंबर को खटीमा, 2 सितंबर को मसूरी गोलीकांड और 2 अक्टूबर को रामपुर तिराहा कांड उत्तराखंड के इतिहास के वे काले अध्याय हैं, जिन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता। शहीदों के त्याग और सर्वोच्च बलिदान के कारण ही पृथक उत्तराखंड राज्य का सपना साकार हुआ है।
राज्य निर्माण में प्राणों की आहुति देने वाले अमर शहीदों के आश्रितों के कल्याण के लिए राज्य सरकार ने पेंशन राशि प्रतिमाह 3,000 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही दिव्यांग आंदोलनकारियों की मासिक पेंशन को 20 हजार रुपये से बढ़ाकर 30 हजार रुपये कर दिया गया है। सरकार ने दिव्यांग आंदोलनकारियों की बेहतर देखभाल और इलाज के लिए मेडिकल अटेंडेंट की व्यवस्था करने का भी बड़ा फैसला लिया है।
आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले अन्य श्रेणियों के आंदोलनकारियों को राहत देते हुए सरकार ने 7 दिन जेल गए या घायल हुए आंदोलनकारियों की पेंशन प्रतिमाह 6,000 रुपये से बढ़ाकर 7,000 रुपये कर दी है। वहीं, जेल गए या घायल श्रेणी से भिन्न अन्य राज्य आंदोलनकारियों की पेंशन को भी 4,500 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि आंदोलनकारियों का सम्मान और उनके सपनों का उत्तराखंड बनाना सरकार का मुख्य संकल्प है।
दूसरी तरफ, उधम सिंह नगर जिले के खटीमा में 1 सितंबर 1994 को हुए ऐतिहासिक गोलीकांड की 32वीं बरसी पर शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। पृथक राज्य की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे निहत्थे आंदोलनकारियों पर उस समय पुलिस ने गोलियां चला दी थीं, जिसमें सात आंदोलनकारी शहीद हो गए थे और 165 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस घटना के बाद कई आंदोलनकारियों को गिरफ्तार कर जेल भी भेजा गया था।
उत्तराखंड राज्य निर्माण सेनानी संगठन के प्रदेश प्रवक्ता भगवान जोशी के अनुसार, 1 सितंबर 1994 को लगभग 10 हजार लोग रामलीला मैदान में एकत्र होकर शांतिपूर्ण जुलूस निकालते हुए सितारगंज रोड की ओर बढ़े थे। जुलूस की वापसी के दौरान कोतवाली गेट के पास अचानक पथराव हुआ, जिसके बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और फिर सीधी फायरिंग शुरू कर दी। इस गोलीबारी में भगवान सिंह, प्रताप सिंह, सलीम, धर्मानंद भट्ट, गोपीचंद, परमजीत सिंह और रामपाल शहीद हो गए थे।
खटीमा से उठी इस जन-आंदोलन की चिंगारी के अगले ही दिन 2 सितंबर को मसूरी में भी पुलिस फायरिंग की घटना हुई, जिसमें छह और आंदोलनकारी शहीद हो गए। इन बलिदानों ने पृथक राज्य आंदोलन को पूरे उत्तराखंड में फैला दिया। खटीमा में आयोजित बरसी कार्यक्रम की तैयारियों का सोमवार को प्रशासन व स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने जायजा लिया। शहीद स्मारक पर आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री धामी भी शामिल होंगे, जिसके लिए एसडीएम तुषार सैनी और पूर्व पालिका अध्यक्ष रमेश चंद्र जोशी सहित आला अधिकारियों ने व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया है।

