Uttarakhand: सड़कों और वन भूमि पर अतिक्रमण पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से 2 सप्ताह में जवाब तलब

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नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रदेश भर में वन भूमि, राष्ट्रीय राजमार्गों, राजकीय राजमार्गों और राजस्व भूमि पर हो रहे अवैध अतिक्रमण पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने इस संबंध में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।

अदालत ने सरकार से पूछा है कि अतिक्रमण हटाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का राज्य में कितना पालन हुआ है। सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने पीठ को बताया कि प्रशासन पूर्व आदेशों का पालन करते हुए कई इलाकों से अतिक्रमण हटा चुका है और इसकी फोटोग्राफिक रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश की जा चुकी है।

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यह मामला मूल रूप से दिल्ली निवासी एक व्यक्ति द्वारा मुख्य न्यायाधीश को भेजे गए शिकायती पत्र से शुरू हुआ था, जिसमें नैनीताल के पदमपुरी इलाके में अफसरों की मिलीभगत से वन भूमि और सड़क किनारे कब्जे की शिकायत की गई थी। कोर्ट ने पत्र का स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका के रूप में सुनवाई शुरू की और बाद में इसका दायरा पूरे प्रदेश के लिए बढ़ा दिया।

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हाईकोर्ट ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों और उप वन संरक्षकों के लिए सख्त दिशानिर्देश तय किए हैं। सभी जिलाधिकारियों को स्पष्ट किया गया है कि अतिक्रमण हटाने से पहले और बाद की स्थिति की स्पष्ट फोटो ली जाए। जबकि सभी DFO और DM कोर्ट में फोटोग्राफ के साथ विस्तृत रिपोर्ट और हलफनामा दाखिल करनें और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के तहत ही सरकारी जमीनों को कब्जा मुक्त कराया जाए।

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उत्तराखंड हाईकोर्ट के इस सख्त रुख के बाद पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। अब दो सप्ताह के भीतर राज्य सरकार को प्रदेश भर में हुई अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई का बिंदुवार ब्योरा अदालत के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।