Uttarakhand: गंगोत्री और डोकियानी ग्लेशियर पिघलने की रफ्तार बढ़ी, NIH रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

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देहरादून। राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, रुड़की ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण में वैज्ञानिक रिपोर्ट दाखिल कर हिमालयी ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने पर गंभीर चिंता जताई है। NIH के वैज्ञानिक-जी डॉ. सुरजीत सिंह द्वारा सौंपी गई इस रिपोर्ट के अनुसार, भागीरथी और यमुना जलग्रहण क्षेत्र में स्थित गंगोत्री से लेकर डोकियानी तक के प्रमुख ग्लेशियर तेजी से पीछे खिसक रहे हैं, जिससे नदियों के जल स्रोतों और पर्वतीय पारिस्थिकी पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

रिपोर्ट के वैज्ञानिक आंकड़ों के मुताबिक, गंगोत्री ग्लेशियर वर्ष 1965 से 2006 के बीच 819 मीटर और 2006 से 2017 के बीच 223 मीटर पीछे खिसका था। वहीं, साल 2017 से 2023 के दौरान इसके पीछे हटने की औसतन रफ्तार 21 मीटर प्रति वर्ष दर्ज की गई है। इसके अलावा डोकियानी ग्लेशियर 2013 से 2023 के बीच 39 मीटर प्रति वर्ष की डरावनी रफ्तार से पिघला है, जबकि टोंस नदी बेसिन में ग्लेशियर क्षेत्र 5.4 प्रतिशत घट गया है।

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वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना केवल बढ़ते तापमान के कारण नहीं है। इसके पीछे गंगोत्री-यमुनोत्री राजमार्गों के चौड़ीकरण के दौरान मलबे का अनुचित निस्तारण, अनियोजित विकास, वनों की अंधाधुंध कटाई और पर्यटन का अत्यधिक दबाव मुख्य वजहें हैं। मलबे के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए उचित डंपिंग साइट बनाने और निर्माण कार्यों के बाद व्यापक पौधारोपण की सख्त सिफारिश की गई है।

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गंभीर होते हालात को देखते हुए एनआईएच ने देश के लिए एक विशेष वैज्ञानिक ‘हिमालय नीति’ तैयार करने का सुझाव दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वन विभाग, एनएचएआई और राज्य सरकार को संयुक्त रूप से पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन कराना होगा। इसके अलावा गंगोत्री नेशनल पार्क और नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व जैसे बेहद संवेदनशील क्षेत्रों में बढ़ते इंसानी हस्तक्षेप और पर्यटन पर अतिरिक्त निगरानी रखने की जरूरत है।

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बता दें कि यह पूरा मामला एनजीटी द्वारा सितंबर 2025 में प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लेने के बाद सामने आया था। एनजीटी ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986, जल अधिनियम 1974 और वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत ऑल वेदर रोड निर्माण से पर्यावरण को हो रहे नुकसान पर जवाब तलब किया था, जिसके बाद NIH रुड़की ने यह वैज्ञानिक रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश की है।

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