नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और डॉक्टरों के बड़े पैमाने पर हो रहे तबादलों पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की रिपोर्ट पर सुनवाई करते हुए स्वास्थ्य सचिव को 12 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है कि डॉक्टरों के बड़े पैमाने पर हुए तबादलों के बाद खाली पदों को भरने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। सुनवाई के दौरान न्यायमित्र ने पीठ के सामने राज्य की चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था का ब्योरा रखा। इस ब्योरे में हल्द्वानी स्थित सुशीला तिवारी अस्पताल के 16 वरिष्ठ डॉक्टरों का एक साथ स्थानांतरण, नैनीताल स्थित बीडी पांडे जिला अस्पताल के कई वरिष्ठ डॉक्टरों का तबादले के कारण OPD और इमरजेंसी सेवाएं प्रभावित होने और हटाए गए डॉक्टरों के स्थान पर नई नियुक्तियों के ना होने जैसे विषय सम्मिलित रहे।
न्यायालय ने चिंता व्यक्त की कि सुशीला तिवारी अस्पताल और बीडी पांडे जिला अस्पताल ये दोनों प्रमुख अस्पताल कुमाऊं मंडल के बड़े रेफरल सेंटर हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों के अचानक हटने से दूर-दराज से आने वाले मरीजों को बिना इलाज के भटकना पड़ रहा है। न्यायमित्र और अधिवक्ताओं ने कोर्ट से इन तबादलों पर पुनर्विचार करने या तुरंत नए विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति सुनिश्चित करने की अपील की है।
हाईकोर्ट द्वारा स्वास्थ्य सचिव को 12 अगस्त को तलब किए जाने के बाद स्वास्थ्य महकमे में खलबली मच गई है। 12 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई में शासन को खाली पदों को भरने की समयबद्ध कार्ययोजना और अस्पतालों में डॉक्टरों की वैकल्पिक व्यवस्था पर अपना जवाब दाखिल करना होगा।

