देहरादून। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और गोपेश्वर समेत पर्वतीय इलाकों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते रविवार को चारधाम यात्रा पूरी तरह ठप हो गई। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने राज्यभर में अलग-अलग स्थानों पर 15 हजार से अधिक तीर्थयात्रियों को एहतियातन रोक दिया है।
प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, केदारनाथ धाम जाने वाले लगभग 5 हजार तीर्थयात्रियों को सोनप्रयाग, गौरीकुंड और गुप्तकाशी में सुरक्षित रोका गया है। इसके अलावा, करीब 1 हजार श्रद्धालु केदारनाथ धाम में ही ठहरे हुए हैं। वहीं, गंगोत्री और यमुनोत्री जाने वाले 7 हजार से अधिक यात्रियों को बड़कोट, दोबाटा और खराड़ी में रोक दिया गया है।
सिख तीर्थस्थल हेमकुंड साहिब जाने वाले 1100 श्रद्धालुओं को घांघरिया गुरुद्वारे और 200 से 300 यात्रियों को स्थानीय होटलों में ठहराया गया है। गोविंदघाट में 1200 तीर्थयात्री रुके हैं, जबकि 200 पर्यटकों को फूलों की घाटी जाने से रोक दिया गया है, क्योंकि फूलों की घाटी भी रविवार को बंद रही।
खराब मौसम और बर्फबारी के बीच उत्तरकाशी के कालिंदी ट्रेक पर 18 पर्यटक फंस गए, जिससे प्रशासन में हड़कंप मच गया। उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने पुष्टि की है कि सभी 18 पर्यटक बेस कैंप में पूरी तरह सुरक्षित हैं। इसके अलावा, बागेश्वर जिले में भी मौसम खराब होने के कारण 43 ट्रेकर्स को सुरक्षित स्थानों पर रोक दिया गया है।
बारिश से राज्य में बड़ा नुकसान हुआ है। पौड़ी जिले की थलीसैंण तहसील के गवारी मल्ली गांव में एक रिहायशी मकान के पीछे चट्टान टूटने से आए मलबे में दबने से 50 वर्षीय बलवीर सिंह की मौत हो गई। थाना थलीसैंण के प्रभारी निरीक्षक रवींद्र सिंह ने बताया कि बलवीर सिंह घर के पीछे बरसाती पानी देखने गए थे, तभी यह हादसा हुआ।
उधर टिहरी जिले के लंबगांव-बिजपुर-पनियाला मोटर मार्ग पर रविवार दोपहर भारी मलबा आने से TGMO की एक बस दुर्घटनाग्रस्त होने से बाल-बाल बची।
लगातार भूस्खलन के कारण गंगोत्री-यमुनोत्री राजमार्ग दिनभर बंद रहे और सिरोबगड़ में भी यातायात बाधित रहा। राज्य भर में बारिश और मलबे की वजह से 128 प्रमुख सड़कें बंद हो गई हैं। इससे पर्वतीय क्षेत्रों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और सड़कों की मरम्मत का काम लगातार हो रही बारिश के कारण बाधित हो रहा है।

