देहरादून। उत्तराखंड में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष पर काबू पाने के लिए वन विभाग ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। विभाग ने इंसानों के लिए गंभीर खतरा बन चुके 13 गुलदारों और 3 भालुओं को मारने के आदेश जारी किए हैं।
देहरादून स्थित वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक राज्य में पिछले सात महीनों के भीतर 118 खतरनाक वन्यजीवों को चिन्हित किया गया था। इनमें 90 गुलदार, 21 बाघ और 8 भालू शामिल हैं, जिनमें से खतरनाक बाघों को पकड़ने के निर्देश दिए गए हैं।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जारी आदेशों के तहत अब तक केवल पौड़ी जिले में एक आदमखोर गुलदार को मारा जा सका है। शेष चिन्हित हिंसक जानवरों की तलाश और निगरानी के लिए टीमें लगातार अभियान चला रही हैं।
वन अधिकारियों का कहना है कि ये वे जानवर हैं जो बार-बार आबादी वाले इलाकों में घुसकर जानलेवा हमले कर रहे थे। किसी भी वन्यजीव को मारने का फैसला चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन की अनुमति से अंतिम विकल्प के रूप में ही लिया जाता है।
राज्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष कितना खतरनाक रूप ले चुका है, इसका अंदाजा आंकड़ों से लगाया जा सकता है। बीते एक दशक (10 सालों) में राज्य के भीतर वन्यजीवों के हमलों में कुल 327 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
वन विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2015 से 2020 के बीच गुलदार के हमलों में 126 लोगों की मौत हुई, जबकि बाघों के हमलों में 23 लोगों ने जान गंवाई। इस दौरान 2020 में अकेले गुलदार ने 30 लोगों को शिकार बनाया।
वहीं वर्ष 2021 से 2026 के बीच मौतों का आंकड़ा और तेजी से बढ़ा है। इस अवधि में गुलदार के हमलों में 111 लोग और बाघ के हमलों में 59 लोग मारे जा चुके हैं। वर्ष 2026 में अब तक 12 बाघ और 16 गुलदार के हमलों में जनहानि हुई है।
पहाड़ी और तराई दोनों क्षेत्रों में हिंसक जानवरों के बढ़ते हमलों से ग्रामीणों में भारी खौफ है। वन विभाग को उम्मीद है कि खतरनाक वन्यजीवों पर इस सख्त कार्रवाई से बस्तियों में सुरक्षा कायम होगी और संघर्ष की घटनाओं में कमी आएगी।

