देहरादून: FDA की छापेमारी में दून मेडिकल कॉलेज और देवभूमि यूनिवर्सिटी की मेस में मिली गंभीर खामियां, मेस सील

ख़बर शेयर करें

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर धामी सरकार ने खाद्य सुरक्षा को लेकर बड़ी सख्ती दिखाई है। स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के निर्देश पर खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग यानि FDA ने दून देहरादून और विकासनगर इलाके में छापेमारी की, अचानक से की गई पड़ताल में दो बड़े संस्थानों गवर्नमेंट दून मेडिकल कॉलेज और देवभूमि यूनिवर्सिटी के मेस-कैफेटेरिया में कई खामियां मिलीं।

इसी कड़ी में आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विनय शंकर पांडेय के निर्देश पर देहरादून और विकासनगर क्षेत्र के विभिन्न संस्थानों के मेस व कैफेटेरिया का औचक निरीक्षण किया गया। इस कार्रवाई के दौरान गवर्नमेंट दून मेडिकल कॉलेज और देवभूमि यूनिवर्सिटी के भोजनालयों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं, जिसके बाद संबंधित मेस और कैफेटेरिया को सुधार होने तक बंद करने के निर्देश दिए गए हैं।

यह भी पढ़ें -  देहरादून में साइबर ठगी: बिना ओटीपी आए बुजुर्ग के खाते से 1.70 लाख पार, जांच में जुटी पुलिस

सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा जनपद देहरादून मनीष सयाना के नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने गवर्नमेंट दून मेडिकल कॉलेज के बॉयज मेस, गर्ल्स मेस और कैफेटेरिया की औचक जांच की। निरीक्षण के दौरान मेस कर्मचारियों के मेडिकल फिटनेस प्रमाण पत्र, पानी की जांच रिपोर्ट, पेस्ट कंट्रोल के दस्तावेज और कैटरर का वैध खाद्य लाइसेंस मौके पर नहीं मिला। इसके अलावा, गर्ल्स हॉस्टल के स्टोररूम में जंग लगी अलमारियां और जीवित कॉकरोच पाए गए, तथा किचन के दरवाजों व खिड़कियों पर जाली न होने से कीटों के प्रवेश का खतरा भी सामने आया।

अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए FDA अधिकारियों ने मेस से खुली हल्दी, दही और तैयार छोले के नमूने जांच के लिए एकत्र किए। इसी प्रकार, दून मेडिकल कॉलेज के कैफेटेरिया के किचन में भी कर्मचारियों की फिटनेस और पानी की जांच रिपोर्ट न मिलने पर संदेह के आधार पर तैयार दाल और डिलिशियस फैट स्प्रेड के नमूने लिए गए।

यह भी पढ़ें -  दून अस्पताल में जल्द शुरू होगी आधुनिक किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट, इमरजेंसी में तैनात रहेंगे पुलिस के तीन जवान

दूसरी ओर, विकासनगर क्षेत्र में वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी संजय तिवारी के नेतृत्व वाली टीम ने देवभूमि यूनिवर्सिटी के किचन का औचक निरीक्षण किया। यहां भी खाद्य लाइसेंस, कर्मचारियों के मेडिकल फिटनेस और पानी की जांच से जुड़े दस्तावेज अनुपस्थित पाए गए। इस दौरान टीम ने दाल मखनी मसाला, राजमा मसाला, तैयार अरहर दाल और पालक-आलू की सब्जी के नमूने लिए, जबकि नंदा की चौकी स्थित एक अन्य प्रतिष्ठान से पनीर का नमूना भी जांच के लिए एकत्र किया गया।

इस पूरी छापेमारी के दौरान कुल 10 खाद्य नमूने एकत्र कर राज्य खाद्य विश्लेषण प्रयोगशाला भेज दिए गए हैं, जिनकी रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। FDA अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक संस्थान सभी खाद्य सुरक्षा मानकों को पूरी तरह से सुनिश्चित नहीं करते, तब तक संबंधित मेस और कैफेटेरिया बंद रहेंगे।

यह भी पढ़ें -  चकराता तहसील में बड़ा वित्तीय घोटाला: 19.81 लाख की हेराफेरी के आरोप में क्लर्क पर शिकंजा

खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने कड़े शब्दों में कहा है कि जनस्वास्थ्य और विद्यार्थियों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और हॉस्टलों में भोजन की गुणवत्ता से समझौता करने वाले कारोबारियों के खिलाफ भविष्य में भी औचक कार्रवाई जारी रहेगी और दोषियों के लाइसेंस निलंबित या निरस्त किए जा सकते हैं।