देहरादून। उत्तराखंड के शहरों और ग्रामीण इलाकों में पेयजल और सीवरेज की समस्या को स्थायी रूप से हल करने के लिए नया इंफ्रास्ट्रक्चर सिस्टम तैयार किया जा रहा है। जल निगम और जल संस्थान द्वारा तैयार की गई विभिन्न परियोजनाओं के प्रस्तावों को विभागीय समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया है, जिन्हें जल्द ही विधिवत मंजूरी देकर काम शुरू कराया जाएगा। इस बड़े प्रशासनिक निर्णय का सीधा लाभ नैनीताल, उत्तरकाशी, अल्मोड़ा, चंपावत और देहरादून जिलों को मिलेगा।
पेजल सचिव रणवीर सिंह चौहान ने बताया कि बढ़ती आबादी के दबाव और जल संकट से प्रभावित क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए ये योजनाएं समयबद्ध तरीके से तैयार की जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभागीय समिति के जरिए सभी प्रस्तावों को त्वरित प्रशासनिक स्वीकृति देकर धरातल पर काम शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
कुमाऊं मंडल के नैनीताल जिले के लिए सबसे बड़ा बजट तय किया गया है, जहां जमरानी बांध के जरिए हल्द्वानी और काठगोदाम क्षेत्र में पानी पहुंचाने के लिए 796 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट तैयार हुआ है। इसके अलावा जिले के पीपल पोखरा में 19.78 करोड़ और कृष्णापुर में 2.13 करोड़ रुपये की लागत से पेयजल योजनाएं बनाई गई हैं।
प्रसिद्ध धार्मिक स्थल जागेश्वर धाम में पर्यटकों और स्थानीय लोगों की जरूरत पूरी करने के लिए पेयजल निगम ने 63.77 करोड़ रुपये की पंपिंग योजना का खाका तैयार किया है। इसके साथ ही अल्मोड़ा के ताकुला ब्लॉक के भेतुली, लोहारखोला और बीना गांव के लिए 1.65 करोड़ रुपये की सोलर पंपिंग योजना स्वीकृत की जा रही है।
राजधानी देहरादून के सहसपुर क्षेत्र में बढ़ती आबादी की मांग को पूरा करने के लिए जल निगम ने 36.08 करोड़ रुपये की कंडोली योजना बनाई है। वहीं चंपावत के पाटी ब्लॉक में 4.99 करोड़ रुपये की खेतीखान योजना और उत्तरकाशी की पुरोला शाखा के तहत 13.05 करोड़ रुपये की सांंकरी पेयजल योजना से स्थानीय निवासियों को पानी के संकट से राहत मिलेगी।

