देहरादून। उत्तराखंड में जल जीवन मिशन के तहत तैयार हो रही 16,500 पेयजल योजनाओं के संचालन और रखरखाव को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में ग्रामीण पेयजल योजनाओं को ग्राम पंचायतों, ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों और तकनीकी विभागों को हस्तांतरित करने के लिए केंद्र सरकार के निर्धारित प्रोटोकॉल को राज्य में लागू करने की मंजूरी दे दी गई। इस फैसले से ग्रामीण इलाकों में पानी की सुचारु आपूर्ति और पाइपलाइनों के रखरखाव की व्यवस्था आसान हो जाएगी।
कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, योजनाओं के स्वरूप और आकार के आधार पर उनके रखरखाव की जिम्मेदारियों को दो स्पष्ट हिस्सों में बांटा गया है, जिसके तहत जिन गांवों में पेयजल योजना केवल उसी गांव की सीमा तक सीमित है, वहां संचालन और दैनिक प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी संबंधित ग्राम पंचायत और ग्राम जल समिति की होगी।
चूंकि ग्राम पंचायतों के पास भारी मशीनों या पंपिंग सेट की तकनीकी मरम्मत का ढांचा मौजूद नहीं है, इसलिए सभी बड़े तकनीकी रखरखाव का काम उत्तराखंड पेयजल निगम और जल संस्थान द्वारा किया जाएगा, जबकि एक से अधिक गांवों तक पानी पहुंचाने वाली बहु-ग्राम परियोजनाओं के संचालन और स्रोत से लेकर वितरण तक का पूरा जिम्मा पेयजल निगम व जल संस्थान की तकनीकी टीमें ही संभालेंगी।
वर्तमान में राज्य में जल जीवन मिशन के तहत स्वीकृत कुल 16,500 योजनाओं में से आधे से अधिक का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, जिन्हें अब नए प्रोटोकॉल के तहत चरणबद्ध तरीके से हैंडओवर किया जाएगा ताकि ग्रामीणों को नल से जल मिलने में किसी तरह की तकनीकी रुकावट न आए।

