देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चार जुलाई को उत्तराखंड के मुख्य सेवक के रूप में अपने कार्यकाल के पांच वर्ष (कुल 1831 दिन) पूरे कर लिए हैं। इस ऐतिहासिक कार्यकाल के दौरान धामी सरकार ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को न सिर्फ मजबूती दी, बल्कि विकास कार्यों को एक अभूतपूर्व रफ्तार प्रदान की है।
समान नागरिक संहिता (UCC) और देश के सबसे कड़े नकल विरोधी कानून जैसे बड़े फैसलों से उत्तराखंड को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिली है। सरकार ने पिछले पांच वर्षों में कृषि, उद्योग, सौर ऊर्जा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नीतिगत सुधार कर रोजगार को बढ़ावा दिया है।
सीएम धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सख्त कानूनों को लागू करने के मामले में देश का सबसे अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। सरकार द्वारा लिए गए ऐतिहासिक फैसले न केवल उत्तराखंड के विकास के लिए मील का पत्थर साबित हो रहे हैं, बल्कि पूरे देश के सामने एक नजीर बन चुके हैं।
UCC लागू करने वाला पहला राज्य
राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने से सभी धर्मों के नागरिकों के लिए विवाह, तलाक और संपत्ति के बंटवारे का समान नियम प्रभावी हो गया है। इसके तहत बहुविवाह प्रथा पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
नए नियम के अनुसार लड़कियों की शादी की उम्र 18 वर्ष और लड़कों की उम्र 21 वर्ष समान रूप से लागू की गई है। साथ ही लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है, जिसका उल्लंघन करने पर कड़ी सजा का प्रावधान है।
वर्तमान में समान नागरिक संहिता के तहत राज्य में चार लाख से अधिक शादियों का पंजीकरण सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका है। इसके साथ ही सोशल सिक्योरिटी और पारदर्शिता के लिए लिव-इन रिलेशनशिप के भी 92 पंजीकरण दर्ज किए जा रहे हैं।
नकल माफिया और दंगाइयों पर कड़ा प्रहार
प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ‘Anti Copying Law Uttarakhand’ (नकल विरोधी कानून) लागू किया गया है। इस कानून के तहत पेपर लीक करने वाले माफियाओं के लिए अधिकतम आजीवन कारावास और 10 करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने का प्रावधान है।
सरकारी परीक्षाओं में अनुचित साधनों का प्रयोग करते पकड़े जाने पर परीक्षार्थियों के लिए भी तीन साल के कारावास और पांच लाख रुपये जुर्माने का नियम तय किया गया है। इसके अलावा दंगा रोधी कानून के तहत सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से ही नुकसान की पूरी वसूली की जाएगी।
दंगाइयों पर नकेल कसने के साथ ही दोषियों पर आठ लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। नुकसान के सटीक आकलन और वसूली की प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार द्वारा एक विशेष क्लेम ट्रिब्यूनल (दावा अधिकरण) का भी गठन किया गया है।
ऐतिहासिक भू-कानून और धर्मांतरण पर रोक
प्रदेश में जबरन, लालच या धोखाधड़ी से धर्म परिवर्तन की घटनाओं को रोकने के लिए ‘उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) अधिनियम’ को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है। यह अब एक गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में शामिल है।
इस सख्त कानून के तहत दोषियों को तीन से 10 वर्ष तक की जेल और न्यूनतम 50 हजार रुपये का जुर्माना देना होगा। सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में दोषियों को 10 साल तक की सजा होगी और पीड़ित को पांच लाख रुपये तक का मुआवजा देना होगा।
इसके साथ ही, ‘Uttarakhand New Land Law’ के तहत पहाड़ी क्षेत्रों की कृषि भूमि को पूरी तरह से सुरक्षित कर दिया गया है। अब कोई भी बाहरी व्यक्ति या संस्था पर्यटन या उद्योग के बहाने कृषि भूमि का अंधाधुंध अधिग्रहण नहीं कर सकती है।
ऊर्जा क्षेत्र में नई क्रांति और सौर ऊर्जा नीति
ऊर्जा के क्षेत्र में धामी सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए ‘नई सौर ऊर्जा नीति 2023’ लागू की है। इस नीति के तहत गैर-कृषि भूमि का उपयोग करते हुए राज्य में 2500 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
लघु जलविद्युत परियोजनाओं के लिए निजी निवेशकों को विशेष प्रोत्साहन और ट्रांसमिशन शुल्क में पूरी छूट दी जा रही है। ‘भू-तापीय ऊर्जा नीति 2025’ के तहत सरकार का लक्ष्य साल 2027 तक 4000 मेगावाट बिजली सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट्स के जरिए उत्पादित करने का है।
डिजिटल गवर्नेंस से बढ़ी पारदर्शिता
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 105 और भ्रष्टाचार विरोधी ऐप के माध्यम से राज्य में प्रशासनिक जवाबदेही तय की गई है। ‘अपनी सरकार’ पोर्टल के माध्यम से 55 से अधिक विभागों की 900 से अधिक ऑनलाइन सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर लाइव हैं।
सचिवालय सहित 80 प्रतिष्ठित कार्यालयों में ई-ऑफिस प्रणाली को लागू किया गया है। विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की धनराशि सीधे लाभार्थियों के खातों में (DBT) भेजी जा रही है, जिससे बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह खत्म हो गई है।
भूमि अभिलेखों का शत-प्रतिशत डिजिटलीकरण कर ऑनलाइन खसरा और खतौनी उपलब्ध कराई गई है। इस बड़े डिजिटल रिफॉर्म के कारण राज्य में जमीन से जुड़े आपसी विवादों और धोखाधड़ी के मामलों में भारी कमी आई है।
औद्योगिक विकास और ₹1.10 लाख करोड़ की ग्राउंडिंग
औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने 30 से अधिक औद्योगिक नीतियों में संशोधन किया है। इसके परिणामस्वरूप पिछले 4 वर्षों में प्रदेश में 20 हजार से अधिक नए एमएसएमई (MSME) उद्योग स्थापित हुए हैं और एक लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिला है।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों की संख्या वर्ष 2024-25 में बढ़कर 79,394 हो गई है, जो वर्ष 2021-22 में मात्र 59,798 थी। दिसंबर 2023 में आयोजित हुए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के बाद सरकार अब तक 1.10 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतार चुकी है।
इस कुल निवेश में से अकेले सौर ऊर्जा क्षेत्र में सबसे अधिक 40 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की ग्राउंडिंग शामिल है। इन औद्योगिक नीतियों के सफल क्रियान्वयन के कारण उत्तराखंड को स्टार्टअप लीडर और निर्यात तैयारी में देश में पहला स्थान प्राप्त हुआ है।
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और देवभूमि का कायाकल्प
देवभूमि की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए सरकार ने ‘मानसखंड मंदिर माला मिशन’ शुरू किया है। इसके तहत कुमाऊं क्षेत्र के ऐतिहासिक 48 मंदिरों में विश्वस्तरीय पर्यटन और इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं का विकास किया जा रहा है।
वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले हरिद्वार कुंभ के बुनियादी ढांचा विकास कार्यों के लिए एक हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा नंदा राज जात के लिए 25 करोड़ रुपये का विशेष बजट आवंटित किया गया है।
विकासनगर के पास यमुना नदी पर स्थित ऐतिहासिक हरिपुर तीर्थ स्थल को धार्मिक पर्यटन से जोड़ने के लिए नए घाटों का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी 13 जिलों में ‘आदर्श संस्कृत ग्राम’ विकसित किए जा रहे हैं।
युवाओं को रोजगार और शिक्षा में बड़े सुधार
रोजगार के मोर्चे पर धामी सरकार ने युवाओं को रिकॉर्ड 30 हजार से अधिक सरकारी नौकरियां प्रदान की हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे प्रतिभावान अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू के लिए 50 हजार रुपये की वित्तीय सहायता दी जा रही है।
शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार के अंतर्गत सरकार ने ‘मदरसा बोर्ड संशोधन विधेयक’ लागू किया है। इसके तहत उत्तराखंड के सभी मदरसों में अब राज्य शिक्षा बोर्ड द्वारा निर्धारित सामान्य और आधुनिक पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा।
आर्थिक मोर्चे पर रिकॉर्ड तोड़ बढ़त
आर्थिक सुधारों के कारण राज्य की जीएसडीपी (GSDP) में भारी बढ़ोतरी के साथ ही प्रतिव्यक्ति आय में 41 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा उत्तराखंड के बजट का आकार बढ़कर अब 1.11 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया है।
नीति आयोग के सतत विकास लक्ष्य (SDG) इंडेक्स में उत्तराखंड ने देश में पहला स्थान हासिल किया है, जो कि साल 2021 में चौथे स्थान पर था। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि राज्य ने आर्थिक मोर्चे पर देश के बड़े राज्यों को पीछे छोड़ दिया है।
‘जो पहली बार हुआ’
- परिवहन निगम का मुनाफा: 20 साल के लंबे घाटे के बाद उत्तराखंड परिवहन निगम वर्ष 2022 के बाद से निरंतर मुनाफे में चल रहा है।
- राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी: उत्तराखंड ने पहली बार 38वें राष्ट्रीय खेलों की सफल मेजबानी की, जिसमें राज्य ने कुल 103 पदक जीतकर देश में सातवां स्थान पाया।
- खनन राजस्व में छलांग: नई खनन नीति से राज्य का खनन राजस्व 300 करोड़ रुपये से बढ़कर सीधे 1100 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
- वित्तीय प्रबंधन: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय प्रबंधन के मामले में उत्तराखंड सभी हिमालयी राज्यों में दूसरे स्थान पर है।
- अतिक्रमण पर प्रहार: सरकारी भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराने के महाअभियान के तहत 10,000 एकड़ भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया।
- शीतकालीन चारधाम यात्रा: विंटर टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखंड के इतिहास में पहली बार आधिकारिक रूप से शीतकालीन चारधाम यात्रा शुरू की गई है।

