उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड खत्म, अब मदरसों से भी निकलेंगे डॉक्टर-इंजीनियर

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देहरादून। उत्तराखंड में बड़ा नीतिगत फैसला लेते हुए राज्य मदरसा बोर्ड को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है. इसके स्थान पर अब ‘उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ का गठन किया गया है। बुधवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीएम आवास में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इस नए प्राधिकरण का शुभारंभ किया। ऐसा क्रांतिकारी कदम उठाने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है, जिसका असर राज्य के हजारों छात्र-छात्राओं पर पड़ेगा।

यह ऐतिहासिक गठन ‘उत्तराखंड अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान विधेयक-2025’ के तहत किया गया है। यह नया प्राधिकरण अब मुस्लिम समुदाय के साथ-साथ राज्य के अन्य सभी अल्पसंख्यक समुदायों के शिक्षण संस्थानों को भी आधिकारिक मान्यता देगा। सीएम धामी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य समाज के हर वर्ग को गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा देना है और यह फैसला बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखेगा।

CM धामी अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को NCRT पुस्तकें भेंट करते हुए
CM धामी अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को NCRT पुस्तकें भेंट करते हुए

आंकड़ों में समझिए इस बड़े फैसले का असर

उत्तराखंड सरकार के इस फैसले से प्रदेश में संचालित हो रहे सभी 452 मदरसों पर अब नए प्राधिकरण के नियम लागू होंगे, यानी इन मदरसों में पढ़ रहे करीब 50 हजार बच्चों को अब आधुनिक शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा। वहीं, नए नियमों के तहत मान्यता प्राप्त करने के लिए अब तक 158 अल्पसंख्यक संस्थानों ने आवेदन भी कर दिया है।

CM धामी उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण शुभारंभ करते हुए
CM धामी उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण शुभारंभ करते हुए

अब मदरसों के छात्र भी बन सकेंगे डॉक्टर-इंजीनियर

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पहले मदरसा बोर्ड की डिग्रियों को उच्च शिक्षा या नौकरियों में वैध मान्यता नहीं मिलती थी, जिससे बच्चों के अवसर सीमित थे. लेकिन अब नए शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता मिलने के बाद यहां के छात्र भी JEE और NEET जैसी राष्ट्रीय परीक्षाएं देकर डॉक्टर और इंजीनियर बन सकेंगे।

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“किसी की परंपराएं और पहचान प्रभावित नहीं होंगी”

जमीन पर किसी भी तरह के संशय को दूर करते हुए सीएम धामी ने साफ कहा कि इस प्राधिकरण की स्थापना किसी समुदाय की पहचान या परंपराओं को प्रभावित करने के लिए नहीं की गई है. इसका एकमात्र लक्ष्य सभी वर्गों को शिक्षा के समान अवसर देना है. सरकार चाहती है कि बच्चे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहें और साथ ही विज्ञान, गणित, कंप्यूटर और स्किल डेवलपमेंट में भी आगे बढ़ें.

CM धामी अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को NCRT पुस्तकें भेंट करते हुए
CM धामी अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को NCRT पुस्तकें भेंट करते हुए

उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का अनुसरण करते हुए ही राज्य में यह बदलाव किया गया है। आज का दौर AI, मशीन लर्निंग और डिजिटल तकनीक का है, इसलिए कोई भी बच्चा पीछे नहीं छूटना चाहिए. कार्यक्रम में सीएम धामी ने अल्पसंख्यक स्कूलों के बच्चों को किताबें व बैग बांटे और मान्यता प्रमाण पत्र भी सौंपे. इस दौरान कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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