उत्तराखंड रोडवेज खरीदेगा 814 नई बसें, पर्वतीय क्षेत्रों के लिए चलेंगी 580 छोटी बसें, बोर्ड बैठक में बड़ा फैसला

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देहरादून। उत्तराखंड परिवहन निगम की 40वीं बोर्ड बैठक में राज्य के यात्रियों के लिए 814 नई बसें चरणबद्ध तरीके से खरीदने का बड़ा फैसला लिया गया है। परिवहन निगम बोर्ड के अध्यक्ष एल. फैनई की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में तकनीकी कर्मियों की कमी दूर करने और भत्ते बढ़ाने को भी मंजूरी दी गई। दूसरी ओर, पिछले दो महीने से वेतन न मिलने से नाराज रोडवेज कर्मचारियों ने बुधवार को देहरादून के ट्रांसपोर्टनगर और आईएसबीटी पर दो-दो घंटे का धरना देकर काम ठप कर दिया

परिवहन निगम के इस फैसले का सबसे बड़ा असर राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों की कनेक्टिविटी पर पड़ेगा। बोर्ड के अनुसार, स्वीकृत की गई 814 नई बसों के बेड़े में से 580 छोटी बसें विशेष रूप से पर्वतीय मार्गों के लिए क्रय की जा रही हैं। अधिकारियों का दावा है कि निगम के इतिहास में पहली बार किसी बोर्ड बैठक में इतनी बड़ी संख्या में बसें खरीदने की अनुमति दी गई है। सामान्य तौर पर रोडवेज के बेड़े से हर साल करीब 15 प्रतिशत बसें निश्चित किलोमीटर या अवधि पूरी होने के बाद रूट से हटा दी जाती हैं।

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अब बोर्ड से एकमुश्त अग्रिम अनुमति मिलने के बाद, निगम अपनी जरूरत के हिसाब से चरणबद्ध तरीके से बसों की खरीद कर सकेगा। इसके लिए हर बार अलग से बोर्ड बैठक बुलाने की आवश्यकता नहीं होगी। कार्यशालाओं की स्थिति सुधारने के लिए बोर्ड ने साल 2013 से खाली चल रहे पदों पर आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से 274 तकनीकी कर्मचारियों को तैनात करने का भी निर्णय लिया है। इससे बसों के समय पर अनुरक्षण और रखरखाव में मदद मिलेगी।

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इसके साथ ही बोर्ड बैठक में फैसला लिया गया कि निगम में तैनात उपनल कर्मियों को अब ‘समान कार्य-समान वेतन’ का लाभ दिया जाएगा। वहीं पीआरडी कर्मियों की वर्ष में 12 दिन की अवकाश अवधि के दौरान अब वेतन में कोई कटौती नहीं की जाएगी। इसके अतिरिक्त निगम के नियमित कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 2 प्रतिशत बढ़ाकर 53 से सीधे 55 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे लगभग 1800 कार्मिकों को लाभ होगा।

करोड़ों के फैसलों पर लटकी वेतन संकट की तलवार

निगम बोर्ड जहां एक तरफ बसों की खरीद और भत्तों में बढ़ोतरी के फैसले ले रहा था, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। पिछले दो महीने से वेतन का भुगतान न होने के कारण रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के बैनर तले कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा है।

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आक्रोशित कर्मचारियों ने ट्रांसपोर्टनगर और ISBT परिसर में जोरदार प्रदर्शन करते हुए प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की। वक्ताओं ने कहा कि वेतन न मिलने से कर्मचारियों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कर्मचारी नेताओं ने दो टूक चेतावनी दी है कि जब तक प्रबंधन बकाये वेतन का भुगतान नहीं कर देता, तब तक यह सांकेतिक धरना और विरोध प्रदर्शन थमेगा नहीं।

इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व ट्रांसपोर्टनगर में प्रदेश महामंत्री दिनेश पंत, प्रदेश कोषाध्यक्ष अनुराग नौटियाल, क्षेत्रीय मंत्री दिनेश सती और भूपेंद्र बडोला ने किया। वहीं आईएसबीटी परिसर में शाखा मंत्री विक्रांत खत्री और अध्यक्ष अतुल पोखरियाल के नेतृत्व में कर्मचारियों ने अपना विरोध दर्ज कराया

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