धाकड़ धुरंधर और अब नंबर 1, रिकॉर्ड की दहलीज पर धामी, लेकिन जुबां पर सिर्फ सम्मान….

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देहरादून। राजनीति में अक्सर उपलब्धियों के साथ तुलना, दावेदारी और श्रेय लेने की होड़ देखने को मिलती है। लेकिन उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक सवाल के जवाब में जिस सादगी और विनम्रता का परिचय दिया, उसने उन्हें एक अलग पहचान देने का काम किया है। मुख्यमंत्री का यह बयान इन दिनों राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जल्द ही उत्तराखंड के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने जा रहे हैं। वह राज्य के पहले ऐसे मुख्यमंत्री बनने की ओर अग्रसर हैं, जो लगातार पांच वर्ष से अधिक समय तक इस पद पर बने रहेंगे। अब तक यह रिकॉर्ड पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के नाम दर्ज रहा, जिन्होंने कांग्रेस सरकार के दौरान पूरे पांच वर्षों तक मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया था।

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जब मुख्यमंत्री धामी से इस रिकॉर्ड और तुलना को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बेहद सहज और संतुलित जवाब दिया। उन्होंने कहा, “मेरा किसी से कोई कंपटीशन नहीं है। उत्तराखंड के जितने भी मुख्यमंत्री रहे हैं, वे उम्र और अनुभव दोनों में मुझसे बड़े रहे हैं। मुझे उन सभी से सीखने का अवसर मिला है।”

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका बचपन उसी क्षेत्र में बीता, जहां तिवारी जी की कार्यशैली और विकास की सोच को करीब से देखने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि तिवारी जी सहित सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने समय में प्रदेश के लिए बेहतर कार्य किए हैं और उनसे उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला है।

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राजनीति में जहां अक्सर पूर्ववर्तियों के कार्यों को कमतर आंकने की प्रवृत्ति देखने को मिलती है, वहीं मुख्यमंत्री धामी का यह दृष्टिकोण अलग संदेश देता है। उन्होंने न केवल अपने पूर्ववर्ती नेताओं का सम्मान किया, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि राजनीति में प्रतिस्पर्धा से अधिक महत्वपूर्ण जनता की सेवा और निरंतर सीखने की भावना है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री धामी का यह बयान उनकी कार्यशैली और व्यक्तित्व की झलक भी है। पिछले कुछ वर्षों में कई मौकों पर उन्होंने अपने बयानों में संयम, संतुलन और वरिष्ठ नेताओं के प्रति सम्मान का भाव व्यक्त किया है। यही कारण है कि उनके इस जवाब को केवल राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि उनके व्यक्तिगत स्वभाव का भी परिचायक माना जा रहा है।

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उत्तराखंड की राजनीति में जहां रिकॉर्ड बनना अपने आप में बड़ी उपलब्धि माना जाता है, वहीं उस उपलब्धि के मुहाने पर खड़े होकर भी विनम्र बने रहना मुख्यमंत्री धामी को अलग पहचान देता है। उनका यह संदेश बताता है कि नेतृत्व केवल लंबे कार्यकाल से नहीं, बल्कि व्यवहार, संवाद और संस्कार से भी तय होता है।

यही वजह है कि रिकॉर्ड बनने से पहले मुख्यमंत्री धामी का यह सादगी भरा बयान राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता तक चर्चा का विषय बना हुआ है। कई लोग इसे एक ऐसे नेता की पहचान मान रहे हैं, जो उपलब्धियों से अधिक सीखने और सबको साथ लेकर चलने की सोच में विश्वास रखता है।

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