देहरादून। उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने आज कुमांऊ और गढ़वाल दोनों मंडलों के आयुक्तों के साथ एक महत्वपूर्ण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राज्य के दोनों मंडलों में आगामी 14 जुलाई को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी करने की आधिकारिक घोषणा की है। इसके बाद प्राप्त होने वाले दावों और आपत्तियों के त्वरित निस्तारण के लिए एक मजबूत कार्ययोजना बनाने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने रोल ऑब्जर्वर की भूमिका निभा रहे दोनों मंडलों के आयुक्तों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के जनपदों की फील्ड विजिट करें। उन्होंने विशेष रूप से ऐसे पोलिंग बूथों का गहन भ्रमण करने को कहा है, जहां पर “अन कलेक्टेबल” श्रेणी में मार्क किए गए मतदाताओं की संख्या अधिक है। इसके साथ ही उन्होंने निर्देश दिए कि मंडलायुक्तों द्वारा डीईओ और ईआरओ स्तर पर जांची गई SSD सूची की भी समय रहते बारीकी से समीक्षा की जाए।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने जमीनी स्तर पर काम करने वाले बूथ लेवल अधिकारियों यानी बीएलओ की जवाबदेही तय करते हुए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि बीएलओ अनिवार्य रूप से ऐब्सेंट, शिफ्टेड और डेथ यानी ASD सूची में शामिल किए गए सभी मतदाताओं के गणना फार्म पर यथोचित और स्पष्ट टिप्पणी अवश्य अंकित करें। ऐसी प्रत्येक टिप्पणी पर बीएलओ के हस्ताक्षरों के साथ-साथ बूथ अवेयरनेस ग्रुप के सदस्यों के भी हस्ताक्षर प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
राज्य में चुनावी तैयारियों को और अधिक पारदर्शी बनाने के प्रशासनिक ढांचे की जानकारी देते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में संपूर्ण प्रदेश के भीतर 70 ERO के साथ ही 800 AERO की विशेष तैनाती की गई है। उन्होंने सभी जनपदों के चुनाव अधिकारियों को इस बात का विशेष ध्यान रखने के सख्त निर्देश दिए हैं कि नोटिस फेज की प्रक्रिया के दौरान राज्य के किसी भी वैध मतदाता को किसी भी प्रकार की अनावश्यक परेशानी या असुविधा का सामना ना करना पड़े।
भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने पर्वतीय क्षेत्रों के लिए अलग और मैदानी क्षेत्रों के लिए अलग कैंप रोस्टर रणनीति बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले आम लोगों के दावे और आपत्तियों के सुगम निस्तारण के लिए सीधे न्याय पंचायत स्तर पर विशेष कैंप लगाने हेतु एक व्यवस्थित रोस्टर तैयार किया जाए। इस व्यवस्था से दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले मतदाताओं को अपने वोटर कार्ड संबंधी सुधारों के लिए जिला मुख्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
वहीं दूसरी ओर, मैदानी क्षेत्र के मतदाताओं की सुविधा और सहूलियत को ध्यान में रखते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने अधिकारियों को विशेष निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि मैदानी भागों में संबंधित तहसीलों के अतिरिक्त नगर निगम कार्यालयों, नगर पंचायतों और सीधे वार्ड लेवल पर भी दावे व आपत्तियों के निस्तारण के लिए विशेष कैंपों का एक विस्तृत रोस्टर तैयार किया जाए। इस कदम से शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के नागरिकों को अपने ही वार्ड में मतदाता सूची से जुड़ी समस्याओं को सुलझाने का बेहतरीन अवसर मिलेगा।
इस अत्यंत महत्वपूर्ण डिजिटल समीक्षा बैठक में कुमांऊ मंडल के कमिश्नर दीपक रावत और गढ़वाल मंडल के कमिश्नर आनंद स्वरुप ने अपने-अपने क्षेत्रों की तैयारियों की रिपोर्ट पेश की। उनके साथ ही इस उच्चस्तरीय बैठक में उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी किशन सिंह नेगी और सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास भी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। सभी वरिष्ठ अधिकारियों ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भरोसा दिलाया कि 14 जुलाई को जारी होने वाली ड्राफ्ट सूची और उसके बाद लगने वाले कैंपों की सभी प्रशासनिक तैयारियां समय से पहले पूरी कर ली जाएंगी।

