उत्तराखंड के भीतर आम जनता और बिजली उपभोक्ताओं को आने वाले समय में एक बहुत बड़ा झटका लग सकता है, क्योंकि ऊर्जा निगम ने बिजली की दरों में सीधे 50 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी करने का एक प्रस्ताव तैयार करके विद्युत नियामक आयोग को आधिकारिक तौर पर भेज दिया है।
राजधानी देहरादून से मुख्य संवाददाता की रिपोर्ट के मुताबिक, ऊर्जा निगम द्वारा नियामक आयोग को भेजे गए इस नए और चौंकाने वाले प्रस्ताव के माध्यम से प्रदेश भर के बिजली उपभोक्ताओं की जेब पर सीधे तौर पर 59 सौ करोड़ रुपये का भारी-कम वित्तीय भार डालने की पूरी तैयारी कर ली गई है।
नियामक आयोग को भेजे गए इस प्रस्ताव के तहत वर्ष 2003 से लंबे समय से लंबित चले आ रहे ग्रॉस फिक्स्ड एसेट और उत्तर प्रदेश के समय की ट्रांसफर स्कीम के बकाए पैसे का पूरा वित्तीय भार अब सीधे तौर पर आम उपभोक्ताओं के ऊपर डाला जा रहा है, जिस पर विद्युत नियामक आयोग ने आम जनता से उनकी आपत्तियां और महत्वपूर्ण सुझाव आमंत्रित किए हैं।
घटनाक्रम के बैकग्राउंड के बारे में विस्तार से मिली जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड का ऊर्जा निगम काफी लंबे समय से प्रदेश सरकार से इस पुरानी बकाया राशि का भुगतान करने की लगातार मांग कर रहा था ताकि निगम की वित्तीय स्थिति को ठीक किया जा सके।
इस बकाए के निपटारे के लिए एक बार बाकायदा ऊर्जा विभाग की ओर से राज्य कैबिनेट में एक विशेष प्रस्ताव भी मंजूरी के लिए भेजा गया था, लेकिन सरकार के वित्त विभाग द्वारा उठाई गई गंभीर वित्तीय आपत्तियों के कारण उस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया गया था।
दरअसल, इस पूरे मामले में ऊर्जा निगम की मुख्य मांग यह थी कि निगम की ओर से सरकार को दिए जाने वाले कुल 5500 करोड़ रुपये को इसी बकाए पैसे से आपस में एडजस्ट यानी समायोजित कर लिया जाए, ताकि उत्तराखंड सरकार और ऊर्जा निगम दोनों की बैलेंस शीट पूरी तरह से सही और संतुलित हो सके।
हालांकि, राज्य का वित्त विभाग ऊर्जा निगम के इस तालमेल और एडजस्टमेंट वाले प्रस्ताव पर किसी भी कीमत पर तैयार नहीं हुआ और वित्त विभाग की इस असहमति के बाद ही रास्ता बंद होने पर ऊर्जा निगम ने इस भारी-भरकम राशि को सीधे आम जनता की जेब से वसूलने की तैयारी कर ली है।
प्रशासनिक गलियारों से आ रही खबर के मुताबिक, आयोग को सौंपे गए प्रस्ताव में वर्ष 2003 से लंबित चल रहे जीएफए और यूपी के समय की ट्रांसफर स्कीम के इसी पुराने बकाए पैसे को शामिल किया गया है, जिसे अब आम उपभोक्ताओं की मासिक बिजली दरों में जोड़कर वसूलने की रणनीति बनाई गई है।
यदि ऊर्जा निगम के इस कड़े और भारी बढ़ोतरी वाले प्रस्ताव को विद्युत नियामक आयोग द्वारा बिना किसी बदलाव के हूबहू मंजूरी दे दी जाती है, तो इससे राज्य में वर्तमान में लागू मौजूदा बिजली दरों में सीधे 50 फीसदी का बहुत बड़ा इजाफा तत्काल प्रभाव से लागू हो जाएगा।
निश्चित रूप से यह संभावित बढ़ोतरी उत्तराखंड के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बहुत बड़ा आर्थिक झटका साबित होगी, लेकिन फिलहाल राहत की बात यह है कि नियामक आयोग ने ऊर्जा निगम के इस प्रस्ताव को केवल अंतिम सुनवाई के लिए ही मंजूर किया है।
इस बड़े और संवेदनशील मुद्दे पर निर्णय की स्थिति स्पष्ट करते हुए विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि जनता से मिलने वाले तमाम सुझावों और आपत्तियों पर आयोग द्वारा बहुत ही गंभीरता के साथ विचार-परामर्श किया जाएगा।
नियामक आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद ने उपभोक्ताओं को आश्वस्त करते हुए साफ शब्दों में कहा है कि आम जनता से प्राप्त होने वाली सभी आपत्तियों और सुझावों की गहन समीक्षा करने के बाद ही बिजली दरों को लेकर कोई अंतिम और सर्वमान्य फैसला लिया जाएगा, जिसके लिए अभी आपत्तियां आमंत्रित की जा रही हैं।
वर्तमान में लागू बिजली की दरों की बात करें तो प्रदेश में बीपीएल श्रेणी के लिए मूल्य 1.85 रुपये प्रति यूनिट है, जबकि 100 यूनिट तक की खपत के लिए यह दर 3.65 रुपये प्रति यूनिट निर्धारित है।
इसी तरह, राज्य में 101 से 200 यूनिट तक बिजली खर्च करने पर वर्तमान दर 5.25 रुपये प्रति यूनिट है और 200 से 400 यूनिट तक की खपत के लिए उपभोक्ताओं को 7.15 रुपये प्रति यूनिट की दर से भुगतान करना पड़ता है।
इसके अलावा, जो उपभोक्ता प्रतिमाह 400 यूनिट से ज्यादा बिजली की भारी खपत करते हैं, उनके लिए वर्तमान में सबसे अधिक 7.80 रुपये प्रति यूनिट की दर लागू है, जिसमें अब ऊर्जा निगम ५० प्रतिशत की बड़ी वृद्धि कराना चाहता है।

