देहरादून। उत्तराखंड के हरिद्वार जनपद में एक 14 वर्षीय किशोरी के साथ दुष्कर्म करने और उसके बाद उसका अवैध गर्भपात कराने के प्रयास का एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। इस अमानवीय घटना की सूचना मिलते ही राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने मामले पर तत्काल कड़ा संज्ञान लेते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। आयोग की अध्यक्ष ने इस पूरे प्रकरण को लेकर हरिद्वार के जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को त्वरित विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
इस झकझोर देने वाले मामले को लेकर हरिद्वार के थाना सिडकुल में एक आधिकारिक तहरीर दी गई है, जिसके अनुसार पीड़ित किशोरी वर्तमान में 22 सप्ताह की गर्भवती पाई गई है। शिकायत के मुताबिक, आरोपी ने इस घिनौनी करतूत को अंजाम देने के बाद किशोरी को डराया-धमकाया और किसी को भी इस बारे में बताने पर उसे जान से मारने की सीधी धमकी भी दी थी। जानकारी के अनुसार, इस घिनौने अपराध को अंजाम देने वाला मुख्य आरोपी पहले से ही विवाहित है और वह एक बच्चे का पिता भी है।
किशोरी के गर्भवती होने की बात सामने आने पर उसका अवैध गर्भपात कराने का एक गंभीर प्रयास भी किया गया, जिसे रुड़की के एक निजी नर्सिंग होम में अंजाम दिया गया था। इस अवैध और गैर-कानूनी गतिविधि की जानकारी मिलते ही महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और एसपी देहात को आरोपी के खिलाफ कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई करने के सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि आरोपी पर पॉक्सो अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित सुसंगत धाराओं के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
इस पूरे मामले में चिकित्सा और प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय करने के लिए आयोग की अध्यक्ष ने जिलाधिकारी, एसएसपी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को तत्काल प्रभाव से एक जनपद स्तरीय संयुक्त जांच समिति गठित करने के लिए कहा है। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को कड़े शब्दों में निर्देश दिए हैं कि इस जांच के दौरान सामने आने वाली किसी भी अवैध या गैर-कानूनी गतिविधि पर तत्काल सख्त वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने इस अमानवीय कृत्य की घोर निंदा करते हुए कहा कि ऐसा घिनौना कृत्य करने वाले अपराधियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि इस अपराध में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भागीदारी करने वाले और कानून का उल्लंघन करने वाले अवैध चिकित्सा केंद्रों को भी किसी भी हाल में माफी नहीं मिलेगी। आयोग इस पूरी जांच प्रक्रिया और पुलिसिया कार्रवाई पर लगातार अपनी पैनी नजर बनाए हुए है।
महिला आयोग के इस कड़े रुख और पुलिस प्रशासन को दिए गए सख्त निर्देशों के बाद से पूरे क्षेत्र के अवैध चिकित्सा केंद्रों और आरोपियों के बीच हड़कंप मच गया है। पुलिस ने पीड़ित किशोरी की सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए मामले की विस्तृत जांच को काफी तेज कर दिया है।

