उत्तराखंड में जल्द लॉन्च होगा मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना का दूसरा चरण, 100 MW बढ़ेगा लक्ष्य

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देहरादून। उत्तराखंड में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने और स्थानीय युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य सरकार जल्द ही ‘मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना’ का दूसरा चरण लॉन्च करने जा रही है। इस बार सरकार ने योजना के तहत 100 मेगावाट अतिरिक्त सोलर क्षमता जोड़ने का लक्ष्य रखा है। प्रमुख सचिव ऊर्जा आर मीनाक्षी सुंदरम के मुताबिक, बिजली की जरूरत को देखते हुए इस बार सौर ऊर्जा का दो विशेष जगहों पर इस्तेमाल किया जाएगा।

इस बड़े फैसले का सीधा फायदा उत्तराखंड के युवाओं, प्रवासियों और छोटे किसानों को मिलेगा, जिन्हें अपने ही राज्य में स्वरोजगार का एक बेहतरीन जरिया मिलेगा। राज्य के कुछ चुने हुए जिलों के लिए इस दूसरे चरण को विशेष तौर पर तैयार कर धरातल पर उतारा जा रहा है।

सरकार की यह बड़ी योजना युवाओं और प्रवासियों को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए एक मजबूत जरिया बनी है। इसके तहत राज्य में 20 किलोवाट से लेकर 200 किलोवाट तक के सोलर प्रोजेक्ट लगाने की मंजूरी दी जाती है। योजना के जो पुराने नियम थे, उन्हें साल 2023 में बदल कर काफी सरल और आसान बना दिया गया था।

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योजना का पहला चरण 250 मेगावाट के लक्ष्य को लेकर शुरू हुआ था। पहले चरण के तहत प्रदेश के कई जिलों में बड़ी संख्या में सोलर प्रोजेक्ट लगाए गए, जिससे राज्य की सोलर क्षमता में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। अब पहले चरण की कामयाबी को देखते हुए सरकार इसके दूसरे चरण की लॉन्चिंग की पूरी तैयारी कर रही है।

पहाड़ों की भौगोलिक परिस्थितियों के लिए खास रणनीति

उत्तराखंड की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने इस बार बड़े सोलर पार्कों के बजाय ‘डिस्ट्रिब्यूटेड सोलर’ यानी छोटे-छोटे सोलर प्रोजेक्ट्स पर अपना पूरा फोकस किया है। पहाड़ों में जमीन की कमी के चलते छोटे प्रोजेक्ट्स को ही स्वरोजगार बढ़ाने और बिजली उत्पादन का सबसे प्रभावी मॉडल माना गया है।

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छोटे स्तर पर बिजली का उत्पादन होने से इसे स्थानीय ग्रिड से आसानी से जोड़ा जा सकता है। इससे ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में बिजली कटौती या ग्रिड फेल होने की समस्या का एक स्थायी समाधान निकालने में मदद मिलेगी।

संकट से निपटने के लिए ‘बैटरी स्टोरेज’ प्लान

सौर ऊर्जा की सबसे बड़ी तकनीकी सीमा यह है कि शाम को जब बिजली की मांग सबसे ज्यादा होती है, तब धूप न होने से सौर ऊर्जा नहीं मिल पाती। इस समस्या को दूर करने के लिए प्रमुख सचिव ऊर्जा आर मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि इस बार सौर ऊर्जा का इस्तेमाल दो जगहों पर करने की योजना है।

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इसके तहत दिन में बनने वाली बिजली का इस्तेमाल ‘पंप स्टोरेज प्लांट’ में दिन के समय नीचे से ऊपर पानी पहुंचाने के लिए किया जाएगा। THDC के पंप स्टोरेज प्लांट में यह काम शुरू भी हो चुका है।

इसके अलावा, केंद्र सरकार की मदद से राज्य में ‘बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम’ (BESS) लगाए जा रहे हैं। इस सिस्टम के जरिए दिन में सोलर पैनल से बनने वाली बिजली को बैटरियों में स्टोर कर लिया जाएगा। फिर शाम के समय जब बिजली की मांग सबसे ज्यादा होगी, तब इस स्टोर की गई बिजली की सप्लाई कर पीक ऑवर्स की किल्लत को आसानी से दूर किया जा सकेगा।

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