देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाले इस राज्य में खेती को ही महिलाओं की तरक्की का सबसे बड़ा जरिया बना दिया है। उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत चल रही ‘महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना’ से अब तक सूबे की 4,20,706 महिलाएं सफलतापूर्वक जुड़ चुकी हैं। देहरादून से जारी आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, इस कदम का सीधा असर ग्रामीण इलाकों के गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है।
इस परियोजना ने वित्त वर्ष 2025-26 में अपने तय लक्ष्य को पीछे छोड़ते हुए बड़ी कामयाबी हासिल की है। इस साल 80,940 महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया था, जिसके मुकाबले मिशन ने तय समय में 87,713 महिलाओं को योजना से जोड़ दिया। इस तरह इस साल महिलाओं को जोड़ने की रफ्तार करीब 108 प्रतिशत दर्ज की गई है।
क्या है पूरा मामला
उत्तराखंड ग्राम्य विकास विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में परिवारों की आर्थिक ताकत बढ़ाने और सेहत को बेहतर करने के लिए बड़ा काम हुआ है। राज्य में अब तक रिकॉर्ड 3,75,236 कृषि पोषण उद्यान स्थापित किए जा चुके हैं। इससे गरीब परिवारों को पोषण मिलने के साथ-साथ कमाई के साधन भी मिल रहे हैं।
महिला किसानों की खेती को आसान और सफल बनाने के लिए कई स्तरों पर ठोस काम किए जा रहे हैं। आमतौर पर पहाड़ों और मैदानों में खेती के कामों में बहुत ज्यादा शारीरिक मेहनत और भारी श्रम की जरूरत पड़ती है। महिला किसान इन कठिन कामों को आधुनिक मशीनों की मदद से आसानी से कर सकें, इसके लिए सरकार ने पूरा ढांचा तैयार किया है।
इसके तहत पूरे उत्तराखंड में 691 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जा चुके हैं। इन सेंटरों का सबसे बड़ा फायदा यह है कि महिला किसान खेती में काम आने वाली बड़ी और आधुनिक मशीनों को बहुत ही कम किराए पर ले सकती हैं। इससे उनका समय भी बचता है और खेती का कठिन काम भी बेहद आसानी से पूरा हो जाता है।
मौसम के नुकसान से बचाने की कोशिश
उत्तराखंड जैसे विविधता वाले राज्य में सामूहिक उत्पादन और बाजार आधारित आधुनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए भी बड़े कदम उठाए गए हैं। इसके लिए राज्य भर में अब तक कुल 2,136 उत्पादक समूह और 86 इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर पूरी तरह काम कर रहे हैं।
अक्सर मौसम के अचानक बदलने या प्रतिकूल होने से किसानों की फसलें खराब होने का डर हमेशा बना रहता है। इससे महिला किसानों की आर्थिक स्थिति पर बहुत बुरा असर पड़ता है। महिलाओं को इस बड़े नुकसान से सुरक्षित रखने में ये इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर बेहद मददगार साबित हो रहे हैं।
बाजार तक पहुंचाने के लिए मजबूत मॉडल
महिला किसानों की मेहनत का असली फल तभी मिलता है जब उनकी फसल और उत्पाद सीधे बाजार तक पहुंचे और उन्हें सही दाम मिले। इसी बात को ध्यान में रखकर उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ने महिला किसानों के उत्पादों को बाजार और ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए एक बेहद मजबूत मार्केटिंग मॉडल तैयार किया है।
इसके तहत प्रदेश में 15 किसान उत्पादक संगठनों की स्थापना की जा चुकी है। इन संगठनों से जुड़कर सूबे की छोटी महिला किसान भी अब सामूहिक रूप से बड़ा उत्पादन कर रही हैं। इससे उन्हें बिचौलियों से मुक्ति मिली है और सीधे बाजार से जुड़ने के कारण उनकी आय में शानदार बढ़ोतरी हो रही है।

