भारत में बाघों के संरक्षण का बदलेगा तरीका: पहली बार आया ‘सक्रिय प्रबंधन’ का रोडमैप

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भारत में बाघों की बढ़ती संख्या को देखते हुए उनके बेहतर संरक्षण के लिए एक नई राष्ट्रीय रणनीति जारी की गई है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और भारतीय वन्यजीव संस्थान ने मिलकर ‘टाइगर्स के सक्रिय प्रबंधन’ का एक विशेष रोडमैप तैयार किया है। इस नई रणनीति को देहरादून से वरिष्ठ संवाददाता द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार देशव्यापी स्तर पर बाघों के बेहतर भविष्य और उनकी सुरक्षा के लिए लागू किया जा रहा है।

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इस नई रणनीति की सबसे खास बात यह है कि इसमें पहली बार ‘एक्टिव मैनेजमेंट’ की अवधारणा को प्रमुखता से अपनाया गया है। नए रोडमैप का मुख्य मकसद सिर्फ बाघों की संख्या में इजाफा करना मात्र नहीं है, बल्कि देश के विभिन्न जंगलों में उनके रहने की जगह को और अधिक सुरक्षित तथा अनुकूल बनाना है। इससे देश भर के टाइगर रिजर्व और वन्यजीव क्षेत्रों में बाघों के बेहतर रख-रखाव पर सीधा सकारात्मक असर पड़ेगा।

क्या है 2006 से 2022 तक का सफर और जरूरत

आंकड़ों के मुताबिक, भारत में वर्ष 2006 में बाघों की कुल संख्या महज 1,411 थी, जो निरंतर प्रयासों के बाद वर्ष 2022 तक बढ़कर 3,682 तक पहुंच गई है। बाघों की इस तेजी से बढ़ती आबादी के कारण अब उनके रहने के स्थानों और सुरक्षा को लेकर नए सिरे से प्रबंधन की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए इस नई रणनीति को धरातल पर उतारने की तैयारी की गई है।

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इस योजना के तहत बाघों को बेहतर माहौल देने के लिए जंगलों में उनके रहने की जगहों में जरूरी सुधार किए जाएंगे। इसके साथ ही, जंगलों में उनके लिए शिकार के जानवरों की संख्या को भी बढ़ाया जाएगा। बाघों के एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में आने-जाने के रास्तों, जिन्हें कॉरिडोर कहा जाता है, उन्हें पूरी तरह से सुरक्षित रखने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।