भारत में महिलाओं द्वारा किए जाने वाले अवैतनिक घरेलू कार्यों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और आंखें खोलने वाली रिपोर्ट सामने आई है। ‘टाइम-यूज सर्वे’ के आंकड़ों के मुताबिक, देश में करीब 21 करोड़ से अधिक महिलाएं बिना किसी वेतन या आर्थिक लाभ के दिन-रात घरेलू कामकाज संभालती हैं और अपने परिवार की देखभाल करती हैं।
यदि महिलाओं द्वारा किए जाने वाले इन अनमोल कार्यों (जैसे साफ-सफाई, खाना बनाना और कपड़े धोना) का आर्थिक मूल्यांकन करके उन्हें उचित वेतन दिया जाए, तो यह सालाना कुल रकम लगभग 22.7 लाख करोड़ रुपये बैठेगी। हाल ही में देश की शीर्ष अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने भी पहली बार गृहिणियों के इस अथक योगदान के महत्व को स्वीकार करते हुए घरेलू महिलाओं को ‘राष्ट्र निर्माता’ के रूप में संबोधित किया था।
रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं पर बिना पैसे वाले इन घरेलू कामों और बच्चों-बुजुर्गों की देखभाल का बोझ लगातार बढ़ता जाता है; जहां 15 से 59 साल की उम्र की महिलाएं रोजाना ऐसे कामों में औसतन 305 मिनट बिताती हैं।
वहीं इस उम्र समूह की 41 फीसदी महिलाएं पूरी तरह घर की देखभाल में समर्पित हैं, जबकि पुरुषों के लिए यह भागीदारी महज 21.4 फीसदी ही दर्ज की गई है। यह सर्वे समाज और देश की अर्थव्यवस्था में महिलाओं के बिना मूल्य वाले योगदान की गहरी महत्ता को वैज्ञानिक ढंग से प्रदर्शित करता है।

