उत्तराखंड आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों को अब राज्य के भीतर ही लेह-लद्दाख जैसी साहसिक गतिविधियों और रोमांच का सीधा अनुभव मिल सकेगा। देहरादून से वरिष्ठ संवाददाता की रिपोर्ट के मुताबिक, धामी सरकार ने चीनी सीमा से सटे अपने सीमांत इलाकों को एडवेंचर टूरिज्म का बड़ा केंद्र बनाने के लिए एक मेगा प्लान तैयार किया है। इस नीतिगत कदम से न केवल बॉर्डर के गांवों का विकास होगा, बल्कि दुनिया भर के ट्रैकर्स को नए रास्ते मिलेंगे।
इस विशेष कार्ययोजना के तहत पिथौरागढ़ जिले में स्थित आदि कैलाश व ओम पर्वत, चमोली की प्रसिद्ध नीति-माणा घाटी और उत्तरकाशी जिले के नेलांग-जादूंग क्षेत्र में साहसिक पर्यटन गतिविधियों का दायरा तेजी से बढ़ाया जाएगा। दरअसल, हर साल हजारों पर्यटक हाई एल्टीट्यूड रन, माउंटेन बाइकिंग, ट्रैकिंग और कैंपिंग के लिए लद्दाख का रुख करते हैं। अब उत्तराखंड का पर्यटन विभाग इसी वर्ग को अपनी ओर खींचने की नई रणनीति पर काम कर रहा है।
देवताल और सतोपंथ ताल बनेंगे रोमांच के नए केंद्र
साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने की इस मुहिम के तहत हाल ही में आदि कैलाश और नीति घाटी में आयोजित की गई हाई एल्टीट्यूड रन को इस बड़े अभियान की सिर्फ एक शुरुआत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में पर्यटन विभाग यहां अल्ट्रा मैराथन के साथ-साथ माउंटेन कार रैली और मोटर बाइक रैली जैसे बड़े व रोमांचक आयोजनों की भी पुख्ता तैयारी कर रहा है। इन आयोजनों का मकसद खेलों के जरिए पर्यटन को नए मुकाम पर ले जाना है।
| लद्दाख का आकर्षण | उत्तराखंड में उसका समानांतर विकल्प |
| जांस्कर और मरखा घाटी ट्रैकिंग | आदि कैलाश और नीति-माणा घाटी की साहसिक ट्रैकिंग |
| पैंगोंग त्सो और नुब्रा घाटी कैंपिंग | नेलांग और जादूंग क्षेत्र की हाई-एल्टीट्यूड कैंपिंग |
| खारदुंग ला का रोमांच | देवताल और सतोपंथ ताल जैसे दुर्गम व खूबसूरत केंद्र |
उत्तराखंड के नीति-माणा और आदि कैलाश क्षेत्र में हाई एल्टीट्यूड गतिविधियों के साथ-साथ अब देवताल और सतोपंथ ताल जैसे बेहद खूबसूरत स्थलों को मुख्य आकर्षण के रूप में विकसित कर एडवेंचर टूरिज्म का दायरा बढ़ाया जाएगा।
वाइब्रेंट विलेज योजना से बदल रही है बॉर्डर की तस्वीर
बॉर्डर से सटे इन सुदूरवर्ती क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार की ‘वाइब्रेंट विलेज योजना’ के तहत युद्धस्तर पर काम किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत उत्तराखंड के सभी सीमांत क्षेत्रों में चमचमाती सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है, जरूरी पर्यटन सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं और स्थानीय स्तर पर होम-स्टे का तेजी से विकास जारी है।
बॉर्डर के इन गांवों की पूरी तस्वीर बदलने के लिए राज्य का पर्यटन विभाग, ग्राम्य विकास विभाग, ऊर्जा निगम समेत तमाम अहम सरकारी विभाग एकजुट होकर इस बड़े मिशन में जुट गए हैं। बुनियादी सुविधाओं और कनेक्टिविटी के सुधरने से साहसिक खेलों के शौकीनों के लिए इन दुर्गम घाटियों तक पहुंचना अब बेहद आसान, सुलभ और सुरक्षित होता जा रहा है।

