उत्तराखंड में खरीदारों के पैसे से अब नहीं खेल सकेंगे बिल्डर, 1 जुलाई से लागू होंगे रेरा के बेहद सख्त नियम

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उत्तराखंड में घर खरीदारों की गाढ़ी कमाई हड़पने और प्रोजेक्ट्स को अधर में लटकाने वाले बिल्डरों के खिलाफ रेरा ने बड़ी घेराबंदी कर दी है। उत्तराखंड रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता लाने के लिए नियमों को बेहद कड़ा कर दिया है। राज्य में आगामी 1 जुलाई से ये नए और सख्त नियम पूरी तरह से प्रभावी हो जाएंगे।

रेरा उत्तराखंड के अध्यक्ष नरेश सी मठपाल ने इस ऐतिहासिक नीतिगत सुधार को लेकर स्थिति साफ की है। अध्यक्ष नरेश सी मठपाल के मुताबिक, इन सुधारों से राज्य के रियल एस्टेट सेक्टर में पूरी पारदर्शिता आएगी। इसके लागू होने के बाद अब आम जनता का अपना आशियाना बनाने का सपना पूरी तरह से सुरक्षित हो जाएगा।

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क्या है पूरा मामला: क्यों उठानी पड़ी रेरा को सख्त कुल्हाड़ी?

दरअसल, राज्य में लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं जहां डेवलपर्स खरीदारों से मोटी रकम वसूलने के बाद भी समय पर प्रोजेक्ट पूरा नहीं करते थे। कई मामलों में बिल्डर्स एक प्रोजेक्ट का पैसा दूसरे नए प्रोजेक्ट में लगा देते थे, जिससे पहली परियोजना अधर में लटक जाती थी। इसी वित्तीय हेराफेरी और मनमानी को रोकने के लिए रेरा ने यह बड़ा कदम उठाया है।

नए नियमों के लागू होने के बाद अब कोई भी डेवलपर एक परियोजना के समय से पूरी होने के बाद ही किसी दूसरी नई परियोजना पर काम शुरू करने का पात्र हो सकेगा। इससे बिल्डरों की मनमानी और अधूरी परियोजनाओं की संख्या पर पूरी तरह रोक लग सकेगी।

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नए नियमों की 3 सबसे बड़ी शर्तें

  • 70% काम का पुख्ता प्रमाण: यदि कोई भी डेवलपर नया प्रोजेक्ट शुरू करना चाहता है, तो उसे रेरा को पुख्ता सबूत देना होगा कि उसकी पहली परियोजना का 70 प्रतिशत काम सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। इससे एक प्रोजेक्ट का पैसा दूसरी जगह डायवर्ट करने की प्रवृत्ति पर पूरी तरह रोक लगेगी।
  • देरी होने पर सार्वजनिक सूचना: यदि किसी भी परिस्थिति में परियोजना की समय-सीमा (डेडलाइन) बढ़ती है, तो बिल्डर को इसकी पूरी जानकारी अनिवार्य रूप से खरीदारों के बीच सार्वजनिक करनी होगी।
  • रिजर्व सेफ्टी फंड और अनिवार्य बीमा: खरीदारों की वित्तीय सुरक्षा के लिए रेरा ने ‘विशेष रिजर्व सेफ्टी फंड’ और ‘अनिवार्य बीमा (बीमा कवच)’ की व्यवस्था की है।
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प्रोजेक्ट डूबा तो बीमा कंपनी चुकाएगी खरीदारों का पैसा

वित्तीय सुरक्षा के नए नियमों के तहत अब खरीदारों से मिलने वाली राशि का एक निश्चित हिस्सा इस अलग से बनाए गए रिजर्व फंड में पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। इस राशि का इस्तेमाल केवल उसी विशिष्ट परियोजना के निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए ही किया जा सकेगा।

वहीं, अनिवार्य बीमा होने से खरीदारों को सबसे बड़ा सुरक्षा कवच मिला है। यदि कोई बिल्डर प्रोजेक्ट बीच में छोड़कर भाग जाता है या फिर प्रोजेक्ट पूरी तरह डूब जाता है, तो ग्राहकों को नुकसान नहीं होगा। ऐसी स्थिति में सीधे तौर पर बीमा कंपनी खरीदारों के प्रति जवाबदेह होगी और ग्राहकों के पैसे की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाएगी।

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