भागीरथी नदी का रुख बदलने से खतरे में आया खूबसूरत हर्षिल, सेना कैंप पर भी मंडराया संकट!

ख़बर शेयर करें

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हर्षिल में मानसून के आगमन से पहले ही एक बार फिर खतरे की स्थिति पैदा हो गई है। भागीरथी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से नदी में बनी झील को चैनललाइज करने के लिए बनाया गया मलबे का टीला शुक्रवार को पूरी तरह बह गया।

इस घटना के बाद नदी की मुख्य धारा का रुख सीधे आवासीय बस्ती की ओर मुड़ गया है। बहाव इतना तेज था कि रविवार को गढ़वाल मंडल विकास निगम गेस्ट हाउस का एक टिनशेड पानी में बह गया।

नदी के इस बदलते रुख के कारण हर्षिल थाना भवन, सेना का कैंप, आवासीय भवन और स्थानीय निवासियों के सेब के बगीचे गंभीर भू-कटाव की चपेट में आ गए हैं। खतरे को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और सिंचाई विभाग की टीमों ने प्रभावित क्षेत्र का मुआयना किया है।

यह भी पढ़ें -  पिथौरागढ़ में जमानत पर बाहर आए हैवान ने 5 साल की मासूम से जंगल में किया दुष्कर्म, पुलिस ने किया गिरफ्तार

क्या है पूरा मामला

दरअसल, हर्षिल में पिछले वर्ष आई आपदा के दौरान भागीरथी नदी में एक अस्थाई झील का निर्माण हो गया था। इस झील के पानी को सुरक्षित तरीके से निकालने और नदी को वापस अपने सही रास्ते पर लाने के लिए सिंचाई विभाग ने मलबे का एक सुरक्षात्मक टीला बनाया था।

गत दिवस नदी का जलस्तर अचानक बढ़ जाने से यह पूरा टीला पानी के तेज वेग में समा गया। टीला बह जाने के बाद भागीरथी नदी ने अपनी धारा बदल ली और वह सीधे रिहायशी इलाकों की तरफ बहने लगी।

इस बदलाव के कारण नदी किनारे बड़े पैमाने पर भू-कटाव शुरू हो गया है। सेना के कैंप के समीप भी मिट्टी का तेजी से कटान हो रहा है, जिससे वहां लगे पेड़ उखड़कर नदी में गिर रहे हैं।

स्थानीय प्रधान सूचित रौतेला और जयवीर नेगी ने जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग पर घोर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि आपदा को 11 महीने बीत चुके हैं, लेकिन झील को अब तक पूरी तरह नहीं खोला गया।

यह भी पढ़ें -  उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग में महा-फेरबदल: मैदान में जमे 300 डॉक्टरों का तबादला, अब अनिवार्य रूप से जाना होगा पहाड़!

यह भी पढ़ें : पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और नदियों के बढ़ते जलस्तर से सुरक्षा के उपाय।

अधिकारियों ने क्या कहा

मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने आपदा प्रबंधन और सिंचाई विभाग की टीम को मौके पर सुरक्षात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए।

डीएम के आदेश पर रविवार को जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दूल गुसाईं एवं सिंचाई विभाग की संयुक्त टीम हर्षिल पहुंची। इस दौरान टीम ने प्रभावित क्षेत्र में हुए नुकसान का बारीकी से मुआयना किया।

सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता सचिन सिंघल ने बताया कि हर्षिल में नदी से सुरक्षा के लिए करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से सुरक्षात्मक कार्य गतिमान हैं।

यह भी पढ़ें -  देहरादून में AMR मीटर के नाम पर वसूला गया अतिरिक्त शुल्क बिलों में होगा एडजस्ट, शासन ने दी मंजूरी

इसके तहत नदी के किनारे RCC दीवारों का निर्माण किया जाना है, जिसका कार्य वर्तमान में किया जा रहा है। विभाग ने इस पूरे सुरक्षात्मक कार्य को एक वर्ष के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

आगे क्या होगा

नदी का रुख आवासीय बस्तियों की तरफ होने से हर्षिल के स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों में भारी चिंता का माहौल है। चूंकि मानसून का समय नजदीक है, ऐसे में नदी का जलस्तर आने वाले दिनों में और अधिक बढ़ने की आशंका है।

यदि सिंचाई विभाग द्वारा तत्काल प्रभाव से नदी की धारा को मोड़ने का प्रयास नहीं किया गया, तो हर्षिल का एक बड़ा हिस्सा नदी की चपेट में आ सकता है। प्रशासन वर्तमान में स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कह रहा है।

ADVERTISEMENTS Ad Ad Ad