उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग में महा-फेरबदल: मैदान में जमे 300 डॉक्टरों का तबादला, अब अनिवार्य रूप से जाना होगा पहाड़!

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उत्तराखंड सरकार ने स्वास्थ्य विभाग में बड़ा फेरबदल करते हुए करीब 300 विशेषज्ञ डॉक्टरों और मेडिकल ऑफिसरों के बंपर तबादले कर दिए हैं। सचिव स्वास्थ्य विनय शंकर पांडे के निर्देश पर रविवार देर शाम इस संदर्भ में आधिकारिक आदेश जारी किए गए हैं।

ट्रांसफर एक्ट के तहत अचानक की गई इस बड़ी कार्रवाई से स्वास्थ्य महकमे में खलबली मच गई है। इस फैसले का सीधा असर देहरादून समेत मैदानी जिलों में सालों से जमे डॉक्टरों और पहाड़ के दुर्गम क्षेत्रों की चिकित्सा व्यवस्था पर पड़ने वाला है। कोरोनाकाल के बाद यह पहला मौका है जब इतनी बड़ी संख्या में डॉक्टरों को एक साथ पर्वतीय जिलों में तैनात किया गया है।

क्या है पूरा मामला

दरअसल, उत्तराखंड के मैदानी इलाकों के अस्पतालों में लंबे समय से कई विशेषज्ञ और मेडिकल ऑफिसर जमे हुए थे। रविवार देर शाम ट्रांसफर एक्ट के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए इन सभी डॉक्टरों को पहाड़ के विभिन्न जिलों में तैनात करने का फैसला लिया गया।

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विदित हो कि कोरोनाकाल के समय से ही डॉक्टरों को तबादला एक्ट से लगातार छूट मिलती आ रही थी। इस बार यह छूट समाप्त करते हुए सरकार ने व्यापक स्तर पर डॉक्टरों के ट्रांसफर किए हैं, जिससे सालों से चल रहा डॉक्टरों का एकाधिकार टूट गया है।

सचिव स्वास्थ्य विनय शंकर पांडे ने बताया कि राज्यभर में कुल 300 डॉक्टरों का ट्रांसफर किया गया है। लंबे समय से मैदान में जमे डॉक्टरों को पहाड़ भेजा गया है, जबकि दुर्गम की सेवा पूरी कर चुके डॉक्टरों को सुगम स्थानों पर तैनाती देकर राहत दी गई है।

दून में जमे डॉक्टरों को पहाड़ भेजा

इस पूरी तबादला सूची का सबसे बड़ा प्रहार देहरादून के चिकित्सा ढांचे पर हुआ है। स्वास्थ्य महानिदेशालय ने देहरादून जिले के विभिन्न अस्पतालों में लंबे समय से डटे 109 डॉक्टरों को हटाकर सीधे टिहरी, उत्तरकाशी और चमोली जैसे पहाड़ी जिलों में भेज दिया है।

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इसके अलावा रुद्रप्रयाग, पौड़ी, चंपावत, पिथौरागढ़ और बागेश्वर आदि जिलों में भी इन डॉक्टरों की नई नियुक्तियां की गई हैं। सूची में ऐसे डॉक्टरों को प्राथमिकता पर शामिल किया गया है, जिन्होंने अपने पूरे सेवाकाल में अब तक एक बार भी दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं नहीं दी थीं।

मेडिकल कॉलेजों में भी होंगे बड़े बदलाव

स्वास्थ्य विभाग के इस बड़े झटके के बाद अब सूबे के मेडिकल कॉलेजों में भी प्राचार्यों के ट्रांसफर की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। सूत्रों के मुताबिक अल्मोड़ा, रुद्रपुर, पिथौरागढ़, हरिद्वार और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में नए प्राचार्यों की तैनाती की जा रही है।

इसके साथ ही चिकित्सा शिक्षा विभाग में निदेशक के पद पर भी बदलाव की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। मामले पर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल का कहना है कि नए प्राचार्यों की तैनाती को लेकर विभाग की एक्सरसाइज पूरी कर ली गई है और जल्द ही आदेश जारी होंगे।

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ज्वाइन नहीं किया तो मरीजों के लिए बढ़ेगी मुश्किल

इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल के सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल इन आदेशों के धरातल पर लागू होने को लेकर है। दरअसल, उत्तराखंड में डॉक्टरों के पहाड़ चढ़ने यानी दुर्गम क्षेत्रों में ड्यूटी ज्वाइन करने में आनाकानी करने की एक पुरानी परंपरा रही है।

यदि पहाड़ भेजे गए डॉक्टरों ने इस बार भी नई ज्वाइनिंग में लापरवाही या आनाकानी की, तो सरकार के लिए स्थिति संभालना मुश्किल होगा। विदित हो कि हाल ही में नियुक्त किए गए CMO को भी अपनी नई तैनाती पर जाने में लंबा समय लगा था।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि पांच से सात प्रतिशत डॉक्टरों ने भी इस फैसले के खिलाफ टकराव का रास्ता चुना, तो चुनावी साल में सरकार के साथ-साथ आम जनता के लिए भी बड़ी मुसीबत खड़ी हो सकती है।

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