देहरादून। उत्तराखंड को वैश्विक पटल पर वेलनेस टूरिज्म का सबसे बड़ा हब बनाने के लिए राज्य सरकार ने अपनी नई योग पॉलिसी के तहत निजी क्षेत्र के लिए खजाना खोल दिया है। आयुष सचिव रंजना राजगुरु के मुताबिक, अब राज्य के होटलों और होमस्टे में योग व वेलनेस सेंटर खोलने वाले निवेशकों को सरकार न सिर्फ भारी सब्सिडी देगी, बल्कि वहां योग प्रशिक्षकों की तैनाती में भी वित्तीय मदद करेगी। इस पूरी योजना का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से देने के लिए आगामी जुलाई महीने में एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च होने जा रहा है, जिसका सीधा असर राज्य के स्वरोजगार और पर्यटन आर्थिकी पर पड़ेगा।
युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की बड़ी तैयारी
उत्तराखंड में योग और वेलनेस के जरिए स्थानीय आर्थिकी को मजबूत करने के लिए सरकार ने नई योग नीति को धरातल पर उतारने की तैयारी तेज कर दी है। इस योजना का मुख्य फोकस प्रदेश के युवाओं को उनके अपने ही क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के बेहतरीन विकल्प मुहैया कराना है।
इसी कड़ी में, सरकार जुलाई में पोर्टल लॉन्च करने के साथ-साथ एक स्वतंत्र ‘आयुर्वेद निदेशालय’ का भी गठन करने जा रही है। आयुष विभाग का यह कदम सरकारी और निजी दोनों ही क्षेत्रों में योग के बुनियादी ढांचे को एक नया और मजबूत आधार देने का काम करेगा, जिससे नए वेलनेस सेंटरों की बाढ़ आने की उम्मीद है।
मैदान और पहाड़ों के लिए अलग नियम
योजना को सुदूर सीमांत क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए सरकार ने वित्तीय सहायता के कड़े और स्पष्ट मानक तय किए हैं। इसके तहत पर्वतीय क्षेत्रों में नया योग और वेलनेस सेंटर स्थापित करने वाले निवेशकों को प्रोजेक्ट की कुल लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम ₹20 लाख तक का बंपर अनुदान दिया जाएगा।
दूसरी ओर, मैदानी क्षेत्रों में निवेश को आकर्षित करने के लिए सरकार प्रोजेक्ट की कुल लागत का 25 प्रतिशत या अधिकतम ₹10 लाख तक की वित्तीय सब्सिडी प्रदान करेगी। यह नियम सीधे तौर पर निजी होमस्टे, रिसॉर्ट, होटल, स्कूल और कॉलेजों में नए वेलनेस और योग केंद्र खोलने पर लागू होगा।
योग प्रशिक्षकों को प्रति सत्र मिलेंगे ₹250
इस पॉलिसी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सरकार केवल इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने में ही मदद नहीं कर रही, बल्कि रोजगार को भी सुरक्षित कर रही है। होमस्टे, रिसॉर्ट, होटलों और शिक्षण संस्थानों में नियुक्त किए जाने वाले योग प्रशिक्षकों के लिए प्रति सत्र ₹250 तक की वित्तीय प्रतिपूर्ति सीधे राज्य सरकार द्वारा की जाएगी।
इसके साथ ही, योग, ध्यान और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए भी विशेष बजट की व्यवस्था की गई है। इस नीति के तहत यदि कोई विश्वविद्यालय, स्वास्थ्य संगठन या गैर सरकारी संगठन योग और वेलनेस पर कोई प्रामाणिक रिसर्च प्रोजेक्ट लाता है, तो उसे प्रति परियोजना ₹10 लाख तक का अनुदान दिया जाएगा।

