गोपेश्वर। बद्रीनाथ धाम में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले दान और चढ़ावे की रकम में हेराफेरी के गंभीर आरोपों के बाद श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने मामले को पूरी गंभीरता से लेते हुए इसकी विस्तृत जांच शुरू कर दी है। मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने इस पूरे मामले पर कड़ा संज्ञान लेते हुए विभागीय स्तर पर तथ्यों की जांच बिठा दी है।
मामले से संबंधित व्यक्तियों से इस पर तत्काल स्पष्टीकरण भी मांग लिया गया है। भैरव सेना द्वारा दान-चढ़ावे की हेराफेरी को लेकर सौंपे गए एक शिकायती पत्र और इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो रहे दावों के आधार पर यह पूरी कार्रवाई शुरू की गई है, जिसका सीधा असर मंदिर प्रबंधन की शुचिता और देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर पड़ रहा है।
करोड़ों भक्तों की आस्था का मामला
मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ का कहना है कि बद्रीनाथ धाम को देश के चारों धामों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है और देश-विदेश के करोड़ों लोगों की अटूट आस्था इससे गहराई से जुड़ी हुई है। ऐसे पवित्र पावन मंदिर के भीतर चढ़ावे और दान की वस्तुओं में हेराफेरी के सामने आ रहे आरोप बेहद चिंताजनक और गंभीर प्रकृति के हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि विभागीय स्तर पर सभी उपलब्ध तथ्यों की पूरी गंभीरता के साथ विस्तृत जांच की जा रही है। मामले के हर एक पहलू को बारीकी से परखा जा रहा है। इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब भैरव सेना ने दान-चढ़ावे में बड़े पैमाने पर हेराफेरी का आरोप लगाते हुए एक विस्तृत शिकायती पत्र मंदिर समिति के सीईओ को प्रत्यक्ष रूप से सौंपा।
इसके बाद समिति ने तत्काल हरकत में आते हुए इस पूरे मामले की गहन विभागीय जांच की प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया है। समिति के सीईओ रांगड़ ने बताया कि इंटरनेट मीडिया पर चढ़ावे की रकम में हेराफेरी को लेकर जो भी दावे प्रसारित हो रहे थे, उनका और भैरव सेना के शिकायती पत्र का पूरी तरह से संज्ञान लिया गया है।
हालांकि, मंदिर प्रशासन के सूत्रों के अनुसार, शुरुआती स्तर पर CCTV कैमरों की फुटेज देखने से फिलहाल कुछ भी स्पष्ट रूप से नजर नहीं आ रहा है। वहीं दूसरी ओर, श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति कर्मचारी महासंघ ने भी इस अत्यंत संवेदनशील मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए अपना मोर्चा पूरी तरह संभाल लिया है।
महासंघ के अध्यक्ष विजेंद्र बिष्ट ने मंदिर समिति के प्रबंधन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष, पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराने का लिखित रूप से विशेष अनुरोध किया है। कर्मचारी महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा है कि चढ़ावा, दान सामग्री और अन्य सभी माध्यमों से प्राप्त होने वाली आय में यदि कहीं भी किसी स्तर पर कोई गड़बड़ी हुई है, तो उसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए।
उन्होंने मांग की है कि जांच के आधार पर दोषियों के विरुद्ध कड़ी और दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जानी चाहिए। इसके साथ ही उनका यह भी स्पष्ट कहना है कि यदि जांच के दौरान लगाए गए ये सभी आरोप पूरी तरह असत्य या भ्रामक पाए जाते हैं, तो ऐसे अफवाह फैलाने वाले तत्वों के विरुद्ध भी कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
तीर्थ पुरोहित समाज और BKTC अध्यक्ष की चेतावनी
इसके समानांतर, बद्रीनाथ धाम स्थित ब्रह्मकपाल तीर्थ पुरोहित समाज के अध्यक्ष अमित सती ने भी इस पूरे प्रकरण पर अपनी बात रखते हुए कहा है कि मंदिर में दान-चढ़ावे को लेकर कर्मचारियों पर लगे हेराफेरी के इन आरोपों की पूर्ण निष्पक्षता के साथ जांच होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि देवभूमि के इस पावन धाम की गरिमा और व्यवस्था की पवित्रता से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
मामले की गंभीरता को देखते हुए श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने भी कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि इस पूरे प्रकरण की पूरी तरह से निष्पक्ष एवं तथ्यपरक जांच सुनिश्चित करने के लिए मंदिर समिति गठित कर दी गई है और संबंधितों से तत्काल स्पष्टीकरण भी मांगा गया है।
उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि जांच में किसी भी स्तर के कर्मचारी के दोषी पाए जाने पर उसके विरुद्ध नियमानुसार अत्यंत कठोर एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
क्या है दान पात्रों से रकम गिनने की पारदर्शी प्रक्रिया?
मंदिर समिति के अधिकारियों ने बद्रीनाथ धाम में दान राशि की गिनती की स्थापित और पारदर्शी प्रक्रिया की जानकारी देते हुए बताया कि धाम में दान राशि गिनने के लिए केवल मंदिर कर्मचारियों को ही नहीं, बल्कि पारदर्शी व्यवस्था के तहत उनके साथ श्रद्धालुओं को भी नियमित रूप से लगाया जाता है। दान पात्रों में भक्तों द्वारा डाली गई समस्त राशि को वहां तैनात श्रद्धालुओं और मंदिर के अन्य वरिष्ठ कर्मचारियों के सामने ही पूरी तरह से खाली किया जाता है।
यह पूरी गिनती सीसीटीवी कैमरों की चौबीस घंटे निगरानी में और मंदिर के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की प्रत्यक्ष देखरेख में ही संपन्न कराई जाती है। इस पारदर्शी गिनती के ठीक बाद पूरी राशि को वहां मौके पर मौजूद रहने वाले अधिकृत बैंक कर्मचारी के सुपुर्द कर दिया जाता है। इसके बाद बैंक कर्मचारी इस समस्त प्राप्त राशि को दोबारा से अपनी गणना करने के बाद ही आधिकारिक रूप से बैंक खाते में जमा कराते हैं।
प्रबंधन ने बताया कि जिन श्रद्धालुओं को दान की राशि की गिनती में शामिल किया जाता है, उन सभी का पूरा आधिकारिक रिकॉर्ड भी मंदिर समिति के पास लिखित रूप में पूरी तरह मौजूद होता है। यात्रा काल के दौरान धाम में श्रद्धालुओं की संख्या अत्यधिक बढ़ने के साथ ही हर दूसरे दिन दान पात्र खाली किए जाते हैं, और यात्रियों की संख्या कम होने की स्थिति में दो से तीन दिन के अंतराल में दान पात्रों से राशि या पात्रों में डाली गई अन्य दान वस्तुओं की पूरी गिनती की जाती है। इस प्रकार दान राशि की गिनती के ठीक बाद इसे सीधे बैंक में और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं को मंदिर समिति के मुख्य खजाने में जमा किया जाता है।

