उत्तराखंड में वोटर लिस्ट सुधार अभियान तेज, 8.39 लाख ‘अनकलेक्टेड’ वोटर्स के घर-घर जाकर होगा सत्यापन

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उत्तराखंड में मतदाता सूची को पूरी तरह त्रुटिहीन और पारदर्शी बनाने के लिए चलाए जा रहे SIR अभियान के तहत राज्य निर्वाचन आयोग ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। देहरादून सचिवालय में आज अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की।

इस बैठक में अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी राजनीतिक दलों से “अनकलेक्टेड श्रेणी” के 8.39 लाख से अधिक मतदाताओं के घर-घर जाकर किए जा रहे भौतिक सत्यापन अभियान में सक्रिय सहयोग देने की पुरजोर अपील की। इस महाअभियान का सीधा असर राज्य की आगामी चुनावी व्यवस्था, फर्जी मतदान पर रोक और मतदाता सूची की शुद्धता पर पड़ने वाला है।

7 जुलाई तक डिजिटाइजेशन का लक्ष्य

बैठक के दौरान अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड में यह पूरी SIR प्रक्रिया 1 जुलाई 2026 की अर्हता तिथि के आधार पर संपन्न की जा रही है. उन्होंने बताया कि आगामी 7 जुलाई तक प्रदेश के सभी बूथों पर गणना पत्रों के वितरण और उनके डिजिटाइजेशन का कार्य हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा।वर्तमान में निर्वाचन विभाग की टीमें इस डेटा को ऑनलाइन सिस्टम पर अपडेट करने के लिए दिन-रात काम कर रही हैं ताकि कोई भी पात्र मतदाता छूट न पाए.

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70 लाख से अधिक मतदाताओं के फॉर्म हुए ऑनलाइन

उत्तराखंड के कुल मतदाताओं के आंकड़े साझा करते हुए डॉ. जोगदंडे ने बताया कि राज्य में कुल 79 लाख 60 हजार 762 पंजीकृत मतदाता हैं. निर्वाचन आयोग के आधुनिक डिजिटल सिस्टम की मदद से अब तक इनमें से 70 लाख 98 हजार 501 मतदाताओं के फॉर्म का सफलतापूर्व डिजिटाइजेशन किया जा चुका है। बाकी बचे हुए मतदाताओं के डेटा को भी 7 जुलाई की समयसीमा से पहले ऑनलाइन सिस्टम से जोड़ दिया जाएगा।

8.39 लाख मतदाता “अनकलेक्टेड श्रेणी” में

बैठक में राजनीतिक दलों के सामने सबसे महत्वपूर्ण आंकड़े “अनकलेक्टेड श्रेणी” के रखे गए, जिनकी कुल संख्या 8 लाख 39 हजार 486 है. आयोग ने साफ किया कि इन वोटर्स के नाम हटाने या संशोधित करने से पहले घर-घर जाकर कड़ी जांच की जा रही है। इनमें 1 लाख 23 हजार 836 वोटर ऐसे हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी है और उनके नाम सूची से हटाए जाने हैं, जबकि 4 लाख 77 हजार 148 मतदाता अपने मूल निवास स्थान को छोड़कर स्थाई रूप से कहीं और चले गए हैं।

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वहीं, 61,764 मतदाता ऐसे पाए गए हैं, जो पहले से ही किसी अन्य स्थान पर नामांकित हैं। इसके अतिरिक्त,1 लाख 68 हजार 259 मतदाता वेरिफिकेशन टीम के पहुंचने पर अपने पते पर अनुपस्थित मिले। 8,479 मतदाता तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से इस विशेष श्रेणी में रखे गए हैं.

नोट कर लें जरूरी तारीखें: 14 जुलाई को ड्राफ्ट रोल, 15 सितंबर को फाइनल लिस्ट

निर्वाचन आयोग ने उत्तराखंड के नागरिकों और राजनीतिक दलों के लिए मतदाता सूची संशोधन का पूरा कार्यक्रम सार्वजनिक कर दिया है। इस कड़ी में 14 जुलाई 2026 मतदाता सूची के ड्राफ्ट रोल का आधिकारिक प्रकाशन किया जाएगा, वहीं 14 जुलाई से 13 अगस्त 2026 से आम जनता और दल मतदाता सूची को लेकर अपने दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे।

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जबकि 14 जुलाई से 11 सितंबर 2026 यह नोटिस की अवधि होगी, जिसके दौरान सभी प्राप्त दावों और आपत्तियों का कानूनी निस्तारण किया जाएगा। 15 सितंबर 2026 से सभी संशोधनों को पूरा करने के बाद उत्तराखंड की अंतिम मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया जाएगा।

शत प्रतिशत BLA नियुक्त करें राजनीतिक दल

अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने एसआईआर प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष बनाने के लिए राजनीतिक दलों की भूमिका को अहम बताया. उन्होंने सभी राष्ट्रीय दलों के प्रतिनिधियों से अपील की कि वे अपने-अपने स्तर पर शत प्रतिशत BLA की नियुक्ति तुरंत सुनिश्चित करें ताकि धरातल पर वेरिफिकेशन सही तरीके से हो सके। सचिवालय में आयोजित इस उच्च स्तरीय बैठक में उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी किशन सिंह नेगी और सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास उपस्थित रहे।

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